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चन्द्रशेखर व्यास पिछले 18 वर्षो से पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़े है। उन्होंने न्युज 18 राजस्थान, इंडिया टीवी न्यूज, नवभारत टाईम्स, टीवी 9 सहित कई संस्थानों में सेवाएं दी है। विधि की पत्रकारिता क्षेत्र में सलमान खान, आसाराम, भंवरी हत्याकांड सहित कई बड़े मामलों में रिपोर्टिंग की है। इसके अलावा नारी उत्थान को लेकर भी इनकी खबरें नींव का पत्थर साबित हुई है। कई मामलों में हाईकोंर्ट ने इनकी खबरों पर संज्ञान लेकर रिर्पोटेबल जजमेंट सुनाएं है।

डॉ. मोहम्मद इम्तियाज

भ्रूण-लिंग जांच के मामलों में पांच बार गिरफ्तार हो चुके डॉ. मोहम्मद इम्तियाज का मेडिकल रजिस्ट्रेशन राजस्थान मेडिकल काउंसिल ने रद्द कर दिया है। जोधपुर पुलिस द्वारा हिस्ट्रीशीटर घोषित किए गए इस डॉक्टर पर वर्षों से पीसीपीएनडीटी सेल कार्रवाई करती रही। अब वह राजस्थान में चिकित्सा प्रैक्टिस नहीं कर सकेगा।

भ्रूण-लिंग जांच के मामले में कई बार पकड़ा जा चुका डॉक्टर मोहम्मद इम्तियाज अब राजस्थान में प्रैक्टिस नहीं कर पाएगा। राजस्थान मेडिकल कौंसिल ने उसका रजिस्ट्रेशन कैंसिल कर दिया है।
पीसीपीएनडीटी सेल ने 5 बार इम्तियाज को गिरफ्तार किया था। पकड़े जाने के बावजूद भी वह अवैध भ्रूण लिंग जांच का गिरोह चलाता रहा।

करीब 7 साल पहले जोधपुर पुलिस ने इम्तियाज को हिस्ट्रीशीटर घोषित किया था। डॉक्टर की हिस्ट्रीशीट खोलने का ये पहला मामला था।

घर में कर रहा था जांचः

डॉ. मोहम्मद इम्तियाज पहली बार साल अक्टूबर 2016 में अवैध भ्रूण-लिंग जांच करते हुए पकड़ा गया था। उस समय वह बालेसर (जोधपुर) सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) का प्रभारी था।
डॉ. इम्तियाज को अपने साथी भैरोंसिंह के घर जांच करते हुए पकड़ा गया था। इस मामले में वो जेल में भी रहा। स्वास्थ्य विभाग द्वारा 8 अक्टूबर 2016 को सस्पेंड कर दिया गया था।

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साथियों के साथ फिर गिरफ्तार

सात महीने बाद फिर से इस धंधे में शामिल हो गया। मई 2017 में डॉ. इम्तियाजअपने दलाल साथियों के जरिए भ्रूण लिंग जांच करते पकड़ा गया। इस मामले में भी उसे गिरफ्तार किया था।

चलती गाड़ी में कर रहा था टेस्ट

जनवरी 2018 में सेल को सूचना मिली थी कि झुंझुनूं की गर्भवती महिलाओं की अवैध भ्रूण लिंग जांच की जा रही है। टीम ने गर्भवती डिकॉय महिला व सहयोगी को भेजा। जोधपुर पहुंचने पर टीम और डिकाय गर्भवती महिला स्टेशन पहुंचे तो दलाल अपनी गाड़ी में बैठाकर गर्भवती को ले गया। चलती गाड़ी में उसकी जांच की गई। इसके बाद सेल की टीम ने डॉ. इम्तियाज को गिरफ्तार कर लिया। उसके पास पोर्टेबल मशीन और 15 हजार रुपए भी मिले।

दलाल साथी के साथ जांच करते पकड़ा

आरोपी एक बार फिर 9 सितंबर, 2018 को पीसीपीएनडीटी सेल ने डिकॉय ऑपरेशन करते हुए पकड़ा गया। डॉ. इम्तियाज अपने दलाल साथी के साथ एक मकान में गर्भवती का अवैध भ्रूण लिंग परीक्षण करते पकड़ा। इसके बाद साल 2022 में भी डॉ. इम्तियाज के खिलाफ एक और मामला सामने आया था।

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इस तरह कैंसिल हुआ रजिस्ट्रेशन

राजस्थान मेडिकल कौंसिल की 136वीं जनरल बॉडी मीटिंग में 30 जून को डॉ. मोहम्मद इम्तियाज का रजिस्ट्रेशन कैंसिल किया गया है।
मानवाधिकार आयोग, नेशनल मेडिकल कमीशन और पीसीपीएनडीटी सेल द्वारा मिली शिकायतों के आधार पर ये कार्रवाई की है। उन्होंने बताया कि पीनल एंड एथिकल कमेटी में हमारे एक्सपर्ट डॉक्टर्स की कमेटी होती है।
कमेटी वादी और परिवादी दोनों पक्षों को सुनने के साथ ही गवाह-सबूत की जानकारी लेने के बाद निर्णय लेती है। पीएनएल एथिकल कमेटी की अनुशंसा पर जनरल बॉडी निर्णय लेती है।

रजिस्ट्रेशन हुआ रद्द, नही कर पाएंगा राजस्थान में प्रैक्टिस

डॉ गिरधर गोयल,
रजिस्ट्रार, राजस्थान मेडिकल कौंसिल।

राजस्थान मेडिकल कौंसिल के रजिस्ट्रार डॉ गिरधर गोयल ने डॉ मोहम्मद इम्तियाज के रजिस्ट्रेशन रद्द किए जाने की जानकारी देते हुए बताया कि अब डॉ. मोहम्मद इम्तियाज राजस्थान में प्रैक्टिस नहीं कर सकते हैं।

पहली बार खोली गई थी हिस्ट्रीशीट

लगातार भ्रूण लिंग जांच को लेकर कुख्यात हो चुके डॉ. इम्तियाज को जोधपुर पुलिस ने हिस्ट्रीशीटर भी घोषित कर दिया था। चार मामले दर्ज होने के बावजूद वो अवैध भ्रूण-लिंग जांच में शामिल रहा। ऐसे मामलों को देखते हुए 7 साल पहले जोधपुर पुलिस ने हिस्ट्रीशीटर घोषित कर दिया था।

क्या कहता है PC-PNDT एक्ट ?

प्री-कंसेप्शन और प्री-नेटल डायग्नोस्टिक टेक्निक (PC-PNDT) एक्ट भ्रूण के लिंग का पता लगाने की डायग्नोस्टिक टेक्निक पर रोक लगाता है और ऐसा करने वाले डॉक्टर को जिम्मेदार ठहराता है।


जोधपुर। चन्द्रशेखर व्यास।

राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य की पंजीकृत गौशालाओं में पेयजल संकट को लेकर राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई है। न्यायालय ने कहा कि वर्ष 2023-24 के बजट में घोषणा होने के बावजूद चार वर्षों में भी गौशालाओं में स्थायी पेयजल व्यवस्था के लिए कोई प्रभावी कार्य नहीं हुआ। कोर्ट ने इसे गंभीर चिंता का विषय बताते हुए सरकार को 15 दिन के भीतर वित्त विभाग से अनुमोदित समयबद्ध कार्ययोजना (Time Bound Schedule) प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।
न्यायमूर्ति डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी एवं न्यायमूर्ति प्रवीर भटनागर की खंडपीठ ने गो ग्राम सेवा संघ, बीकानेर की जनहित याचिका (डी.बी. सिविल रिट पिटीशन संख्या 912/2024) पर 6 जुलाई 2026 को यह महत्वपूर्ण आदेश पारित किया। एडवोकेट मोतीसिंह राजपुरोहित ने इस मामले में याचिकाकर्ता का पक्ष रखा।


3,861 गौशालाएं, 2,220 में ट्यूबवेल नहीं


कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत रिकॉर्ड के अनुसार राजस्थान में 3,861 पंजीकृत गौशालाएं संचालित हैं। इनमें से 1,641 गौशालाओं में स्वयं का ट्यूबवेल उपलब्ध है, जबकि 2,220 गौशालाएं ऐसी हैं जहां स्थायी पेयजल व्यवस्था के लिए ट्यूबवेल लगाने की आवश्यकता है।
कोर्ट ने कहा कि सरकार द्वारा बार-बार प्रयासों का दावा किए जाने के बावजूद जमीन पर एक भी ऐसी गौशाला में स्थायी पेयजल सुविधा विकसित नहीं की गई, जहां इसकी आवश्यकता थी।

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740 गौशालाओं की स्थिति सबसे गंभीर


राज्य सरकार ने स्वयं स्वीकार किया कि 740 गौशालाएं अत्यधिक संकटग्रस्त हैं और वहां तत्काल पेयजल अवसंरचना विकसित करने की जरूरत है। इसके लिए सरकार ने तीन चरणों में योजना प्रस्तुत की—
प्रथम चरण: 387 गौशालाएं (सरकारी भूमि पर)
द्वितीय चरण: 234 गौशालाएं (स्वामित्व अथवा निजी भूमि पर)
तृतीय चरण: 323 गौशालाएं (दान अथवा किराए की भूमि पर)

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कोर्ट बोला—चार वर्षों से केवल आश्वासन


हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि वर्ष 2022 से लगातार आदेश पारित किए जा रहे हैं। 2023, 2024, 2025 और अब 2026 तक भी स्थायी समाधान लागू नहीं हो पाया। गर्मी के मौसम में भी सरकार यह साबित नहीं कर सकी कि गौशालाओं में पर्याप्त पेयजल की व्यवस्था की गई है।
कोर्ट ने कहा कि केवल अस्थायी पानी के टैंकर या अन्य वैकल्पिक व्यवस्थाएं पर्याप्त नहीं हैं। राज्य को दीर्घकालीन एवं स्थायी समाधान लागू करना होगा।


अवमानना की कार्रवाई बनती है, लेकिन फिलहाल टाली


खंडपीठ ने स्पष्ट कहा कि रिकॉर्ड के आधार पर प्रथम दृष्टया अवमानना (Contempt) की कार्रवाई बनती है, क्योंकि पूर्व आदेशों का पालन नहीं हुआ। हालांकि अतिरिक्त महाधिवक्ता, पशुपालन विभाग के सचिव और गोपालन विभाग की निदेशक द्वारा दिए गए आश्वासन को देखते हुए फिलहाल अवमानना पर विचार स्थगित कर दिया गया।


15 दिन में वित्त विभाग से स्वीकृत योजना पेश करने के निर्देश
कोर्ट ने निर्देश दिया कि—


15 दिनों के भीतर वित्त विभाग से परामर्श एवं स्वीकृति प्राप्त समयबद्ध कार्ययोजना न्यायालय में प्रस्तुत की जाए।
यह योजना 21 जुलाई 2026 तक कोर्ट के समक्ष दाखिल की जाए।
किसी भी स्थिति में योजना का क्रियान्वयन तीन माह के भीतर शुरू किया जाए।
व्यवहारिक रूप से कार्य 1 अक्टूबर 2026 से पहले प्रारंभ होना चाहिए।


याचिकाकर्ता के सुझावों पर भी विचार


याचिकाकर्ता की ओर से तीन सुझाव दिए गए, जिन पर कोर्ट ने सरकार को विचार करने की स्वतंत्रता दी
जहां संभव हो, तीन फेज बिजली कनेक्शन के बजाय सिंगल फेज कनेक्शन देकर ट्यूबवेल शीघ्र शुरू किए जाएं।
मानसून आने तक गौशालाओं में वर्तमान अस्थायी पेयजल व्यवस्था पूरी मजबूती से जारी रखी जाए ताकि पशुओं को पानी की कमी न हो।
जिन क्षेत्रों में भूजल उपलब्ध नहीं है, वहां ट्यूबवेल के स्थान पर पाइपलाइन अथवा वाटर होज व्यवस्था को वैकल्पिक समाधान के रूप में अपनाने पर विशेषज्ञ निर्णय लें।


वित्त सचिव को भी बनाया पक्षकार


सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की मौखिक प्रार्थना पर राजस्थान सरकार के वित्त विभाग के सचिव को भी मामले में प्रतिवादी बनाया गया है। कोर्ट ने उन्हें नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं।
हालांकि अगली सुनवाई पर पशुपालन विभाग के सचिव एवं गोपालन विभाग की निदेशक की व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट प्रदान कर दी गई है।
अगली सुनवाई 27 जुलाई
हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई 2026 निर्धारित की है। तब तक राज्य सरकार को वित्त विभाग की स्वीकृति सहित विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत करनी होगी।

वर्ष 2016 की दवा खरीद में 61.24 लाख रुपये के कथित घोटाले पर एफआईआर।
पांच नामजद सहित अन्य के खिलाफ मामला दर्ज।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और IPC की विभिन्न धाराओं में मुकदमा, सीएमएचओ कार्यालय जोधपुर से जुड़ा मामला।

जोधपुर। चन्द्रशेखर व्यास।

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने वर्ष 2016 में जोधपुर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) कार्यालय में दवाइयों एवं चिकित्सा सामग्री की खरीद में कथित अनियमितताओं के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए एफआईआर दर्ज की है। एसीबी जिला जयपुर के सीपीएस थाना में दर्ज एफआईआर संख्या 182/2026 में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धाराओं 13(1)(d), 13(2) तथा भारतीय दंड संहिता की धाराएं 467, 468, 471, 477-ए एवं 120-बी के तहत मामला दर्ज किया गया है।
एफआईआर के अनुसार यह मामला वर्ष 2016 में हुई खरीद प्रक्रिया से संबंधित है, जबकि शिकायत के आधार पर 6 जुलाई 2026 को प्रकरण दर्ज किया गया।

इन लोगों को बनाया गया आरोपी

एफआईआर में तत्कालीन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय से जुड़े खरीद प्रकरण में पांच लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया है। इनमें गिरधारी सिंह उदावत, सुभोद सक्सेना (मैसर्स हर्ष डिस्ट्रीब्यूटर्स), जय कुमार शर्मा (मैकोन फार्मा), कमलेश बोहरा (सीमा मेडिकल) तथा गौतमकांत लाढा (ललित फार्मा) के नाम शामिल हैं। इसके अलावा अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच की जाएगी।

क्या है पूरा मामला?

एफआईआर में उल्लेख है कि वर्ष 2016 में राज्य सरकार की नि:शुल्क दवा योजना के तहत जोधपुर सीएमएचओ कार्यालय द्वारा विभिन्न दवाइयों एवं चिकित्सा सामग्री की खरीद के लिए निविदाएं आमंत्रित की गई थीं। आरोप है कि खरीद प्रक्रिया में निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया गया तथा निविदा प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं बरती गईं।
जांच में आरोप लगाया गया है कि निविदा प्रक्रिया में कुछ फर्मों को अनुचित लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से नियमों की अनदेखी की गई। साथ ही खरीद आदेश जारी करने और भुगतान की प्रक्रिया में भी रिकॉर्ड में हेरफेर एवं दस्तावेजों के कथित फर्जी उपयोग की बात सामने आई है।

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61.24 लाख रुपये की सरकारी राशि का नुकसान

एफआईआर के अनुसार कथित अनियमितताओं के कारण सरकार को 61,24,671 रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ। इस राशि को सरकारी संपत्ति के रूप में दर्शाते हुए भ्रष्टाचार एवं वित्तीय अनियमितता का मामला दर्ज किया गया है।

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विभिन्न फर्मों को जारी किए गए थे खरीद आदेश

एफआईआर में सीमा मेडिकल, मैकोन फार्मा, ललित फार्मा सहित अन्य फर्मों को वर्ष 2016 के दौरान लाखों रुपये के खरीद आदेश जारी किए जाने का उल्लेख है। आरोप है कि निविदा प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही खरीद आदेश जारी किए गए तथा नियमों के विपरीत भुगतान भी किया गया। जांच में खरीद आदेशों, भुगतान रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेजों की विस्तृत जांच की जाएगी।

पूर्व जांच के बाद दर्ज हुई एफआईआर।

प्रकरण में पहले प्रारंभिक जांच कराई गई थी। जांच रिपोर्ट में खरीद प्रक्रिया में अनियमितताओं, नियमों का उल्लंघन तथा सरकारी धन के दुरुपयोग के प्रथम दृष्टया साक्ष्य मिलने के बाद एसीबी ने नियमित एफआईआर दर्ज की है। इसके आधार पर अब विस्तृत आपराधिक जांच शुरू कर दी गई है।

एसीबी करेगी दस्तावेजों और भुगतान की गहन जांच।

एफआईआर दर्ज होने के बाद एसीबी अब संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों और फर्मों से जुड़े दस्तावेजों, भुगतान रिकॉर्ड, निविदा प्रक्रिया तथा खरीद आदेशों की गहन जांच करेगी। जांच के दौरान आवश्यकता पड़ने पर अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका भी जांच के दायरे में लाई जा सकती है।

किन धाराओं में दर्ज हुआ मामला ?

एसीबी ने इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(1)(d) एवं 13(2) के साथ भारतीय दंड संहिता की धाराएं 467 (जालसाजी), 468 (धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी), 471 (फर्जी दस्तावेज का उपयोग), 477-ए (लेखा अभिलेखों में हेरफेर) तथा 120-बी (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत मुकदमा दर्ज किया है।

जोधपुर/नई दिल्ली। चन्द्रशेखर व्यास।

राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं बाल अधिकार संरक्षण के क्षेत्र में लंबे समय तक उल्लेखनीय सेवाएं देने वाले डॉ. ओम प्रकाश व्यास को दिल्ली राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। उनकी नियुक्ति को बाल अधिकारों और मानवाधिकार संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में निभाई अहम जिम्मेदारियां

डॉ. व्यास इससे पूर्व राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (नई दिल्ली) में जॉइंट रजिस्ट्रार के पद पर कार्यरत रहे हैं। उन्होंने विधि (लॉ) में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की है और अपने कार्यकाल के दौरान मानवाधिकार से जुड़े अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय विषयों पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।

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अंतरराष्ट्रीय मंचों पर किया भारत का प्रतिनिधित्व

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में सेवा के दौरान डॉ. व्यास ने मानवाधिकार से जुड़े कई अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में भारत का प्रतिनिधित्व किया। उनके अनुभव और विशेषज्ञता के कारण उन्हें वैश्विक स्तर पर भी भारत की ओर से महत्वपूर्ण मंचों पर भागीदारी का अवसर मिला।

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बाल श्रमिकों को कराया मुक्त

डॉ. व्यास ने नक्सल प्रभावित राज्यों में विशेष अभियानों के दौरान नक्सलियों की गोलीबारी के बीच बंधक बनाए गए सैकड़ों बाल श्रमिकों को मुक्त कराने में उल्लेखनीय भूमिका निभाई। उनके इस साहसिक और उत्कृष्ट कार्य के लिए भारत के राष्ट्रपति द्वारा उन्हें राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित किया गया।

संयुक्त राष्ट्र सहित कई संस्थानों में रहे विषय विशेषज्ञ

राजस्थान के सीकर जिले के श्रीमाधोपुर कस्बे के निवासी डॉ. ओम प्रकाश व्यास मानवाधिकार कानून के विशेषज्ञ माने जाते हैं। वे संयुक्त राष्ट्र संघ के विभिन्न मंचों पर आमंत्रित विषय विशेषज्ञ के रूप में अपने विचार रख चुके हैं। इसके अलावा देश के विभिन्न राज्यों के पुलिस अधिकारियों, जेल अधिकारियों और मानवाधिकार संस्थाओं को कानून एवं मानवाधिकार विषय पर प्रशिक्षण भी देते रहे हैं।

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बाल अधिकार संरक्षण को मिलेगी नई दिशा

डॉ. व्यास की दिल्ली राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष पद पर नियुक्ति से बाल अधिकारों की सुरक्षा, संरक्षण और संवर्धन के क्षेत्र में आयोग की कार्यप्रणाली को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। वहीं उनके गृह राज्य राजस्थान, विशेषकर सीकर जिले के श्रीमाधोपुर क्षेत्र में इस उपलब्धि पर हर्ष का माहौल है।

आज दोपहर 3 बजे सजा पर सुनाएगा कोर्ट का फैसला।


जोधपुर। चन्द्रशेखर व्यास।

चार माह की मासूम बच्ची से दुष्कर्म के बहुचर्चित मामले में पोक्सो ग्रामीण कोर्ट ने आरोपी रोहित कुमार उर्फ रोहन कुमार, निवासी बिहार, को दोषी करार दिया है। मामले में सजा का ऐलान आज दोपहर 3 बजे किया जाएगा।

इस संवेदनशील प्रकरण की सुनवाई फास्ट ट्रैक आधार पर हुई।


घटना 15 मार्च 2025 की है। पीड़िता के माता-पिता ईंट भट्टे पर मजदूरी करते थे। कार्य के दौरान वे अपनी चार माह की मासूम बच्ची को फैक्ट्री परिसर में स्थित अपने कमरे में छोड़कर काम पर गए थे। कुछ समय बाद लौटने पर बच्ची घायल अवस्था में मिली। बच्ची की हालत देखकर परिजनों के होश उड़ गए।

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मौके पर पकड़ा आरोपी को।


परिजनों ने मौके पर ही आरोपी रोहित कुमार उर्फ रोहन कुमार को पकड़ लिया। और आसपास के लोगों को इसकी सूचना दी। इसके बाद मासूम को तत्काल अस्पताल ले जाया गया। जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए जोधपुर के उम्मेद अस्पताल रेफर किया गया।

फास्टट्रैक कोर्ट में हुई सुनवाई।


मामले में पुलिस ने 15 मार्च 2025 को जोधपुर ग्रामीण थाने में प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।

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ऐसे चली सुनवाई।

लोक अभियोजक – नरपत चौधरी।

लोक अभियोजक नरपत चौधरी ने बताया कि पोक्सो ग्रामीण कोर्ट के न्यायाधीश डॉ दुष्यंत दत्त ने अभियोजन पक्ष की दलीलों और साक्ष्यों को स्वीकार करते हुए आरोपी को दोषी करार दिया है। सजा के बिंदु पर फैसला दोपहर 3 बजे सुनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से 23 गवाहों के बयान और 53 दस्तावेजी व अन्य साक्ष्य न्यायालय में प्रस्तुत किए गए।

समाज को संदेश।


जनजागरूकता संदेश: बच्चों की सुरक्षा समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। माता-पिता, अभिभावकों और आम नागरिकों को बच्चों के प्रति होने वाले किसी भी प्रकार के अपराध या संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तत्काल पुलिस को देनी चाहिए, ताकि ऐसे अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।

पैरोल अवधि समाप्त होने के बाद भी नही उपस्थित हुआ जेल में।
उपाधीक्षक केन्द्रीय कारागार ने मुकदमा करवाया दर्ज।

जोधपुर। चन्द्रशेखर व्यास।

पैरोल अवधि खत्म होने के बाद बंदी के फरार होने का मामला सामने आया है। दरअसल दण्डित बंदी दीपाराम पुत्र मफाजी भील पैरोल अवधि समाप्त होने के बाद भी जेल नही लौटा।
फरार बंदी दीपाराम भील कॉलोनी रायपुर मण्डार सिरोही निवासी बताया जा रहा है।

जेल उपाधीक्षक ने मुकदमा करवाया दर्ज।

जोधपुर सेन्ट्रल जेल उपाधीक्षक ने रातानाडा थाने में इस बाबत मुकदमा दर्ज करवाया है। उन्हाने लिखित शिकायत में बताया कि बंदी दीपाराम पैरोल खत्म होने के बाद से फरार है। वह पैरोल अवधि समाप्त होने के बाद जेल में उपस्थित नही हुआ है। उसे गत 2 जुलाई को सेन्ट्रल जेल में उपस्थित होना था लेकिन वह नही आया।

क्यो दी जाती है बंदियों को पैरोल ?

जेल में बंद बंदियों को खास परिस्थितियों में एक ​सीमित समय के लिए पैरोल दी जाती है। पैरोल में जेल से बाहर रहने की अनुमति मिलती है। जबकी उनकी सजा जारी रहती है। इसके लिए कैदी का व्यवाहार अच्छा होना चाहिए। उसे धीरे—धीरे फिर से समाज से जोड़ने के लिए पैरोल दी जाती है।

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आपा​तकालीन परिस्थितियों में पैरोल।

इसके अलावा कुछ आपाकालीन परिस्थितियों में भी पैरोल दी जाती है। परिवार के किसी की गंभीर बिमारी के दौरान उपचार व सेवा के लिए। किसी परिवारिक व्यक्ति की मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार जैसी स्थिति में पैरोल दी जाती है।

क्या है पैरोल की शर्तों का महत्व?

पैरोल देने के दौरान कुछ शर्ते रखी जाती है। जिनका पालन करना कैदीयों के लिए जरूरी होता है। इन शर्तों के तोड़ने पर पैरोल तुरंत रद्द कर दी जाती है। पैरोल मिलने के बाद कोई बंदी जब पैरोल की शर्तों का पालन करता है। पैरोल अवधि समाप्त होने पर जेल में नियत समय पर उपस्थित हो जाता है तो उसे फिर से भविष्य में पैरोल मिलने के अवसर दिए जाते हैं।

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पैरोल से फरार।

जब कोई बंदी पैरोल अवधि समाप्त होने के बाद जेल में उ​पस्थित नही होता है। तो उसे पैरोल से फरार बंदी घोषित कर दिया जाता है। उसके खिलाफ पैरोल से फरार होने का मुकदमा दर्ज करवाया जाता है। भविष्य में ऐसे बंदियों को पैरोल नहीं दी जाती है।

ओसियां: खुले नाले से लगातार हादसे, सैकड़ों वाहन गिरने के बाद भी नहीं जागा प्रशासन

फोटो : मनीष ओझा।

रेलवे स्टेशन के आगे तिंवरी रोड पर ओझा स्वीट होम के सामने बना खुला नाला बना जानलेवा, ग्राम पंचायत और PWD एक-दूसरे पर डाल रहे जिम्मेदारी।

ओसियां। कस्बे के रेलवे स्टेशन के आगे से मेला मैदान तिंवरी रोड की ओर जाने वाले मार्ग पर. ओझा स्वीट होम के सामने रेलवे की दीवार के पास स्थित खुला नाला. लगातार हादसों को न्योता दे रहा है. स्थानीय लोगों के अनुसार इस नाले में अब तक कई दोपहिया और अन्य वाहन गिर चुके हैं. जबकि कई राहगीर घायल हो चुके हैं. इसके बावजूद संबंधित विभागों की ओर से न तो नाले को ढकने की पहल की गई है और न ही स्थायी समाधान किया गया है.

जिम्मेदारी से बच रहे विभाग

स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस समस्या के समाधान को लेकर, विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं। ग्राम पंचायत का कहना है कि यह क्षेत्र सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) के अधीन आता है. जबकि PWD इसे ग्राम पंचायत का क्षेत्र बताकर, अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहा है. विभागों के इस रवैये का खामियाजा आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है.

हर दिन बना रहता है हादसे का डर

यह मार्ग कस्बे का व्यस्त रास्ता है. जहां से प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग और वाहन गुजरते हैं. रात के समय और बरसात में यह खुला नाला और भी खतरनाक हो जाता है. पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था, बैरिकेडिंग या चेतावनी संकेत नहीं होने से दुर्घटना की आशंका लगातार बनी रहती है.

जनता ने उठाए सवाल

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब लगातार हादसे हो रहे हैं. तो आखिर प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार क्यों कर रहा है? लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है. कि संबंधित विभाग की जिम्मेदारी तत्काल तय कर. नाले को ढकने अथवा उसकी मरम्मत का स्थायी समाधान कराया जाए. ताकि भविष्य में किसी की जान जोखिम में न पड़े.

प्रशासन से कार्रवाई की मांग

क्षेत्रवासियों ने चेतावनी दी है. कि यदि शीघ्र समाधान नहीं किया गया. तो जनहित में आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा. लोगों का कहना है कि प्रशासनिक उदासीनता अब सीधे लोगों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन चुकी है. इस पर तत्काल प्रभावी कार्रवाई आवश्यक है।

श्रद्धांजलि या लापरवाही? करोड़ों के सौंदर्याकरण में शहीद बालमुकुंद बिस्सा की प्रतिमा ही ओझल, इंजीनियरिंग पर उठे सवाल।

जोधपुर। युगावर्त व्यास।

जालोरी गेट चौराहे पर स्वतंत्रता सेनानी शहीद बालमुकुंद बिस्सा की प्रतिमा के आसपास बनाए जा रहे सौंदर्याकरण कार्य ने श्रद्धांजलि से ज्यादा शहीद का अपमान कर दिया है। प्रतिमा के ऊपर बनाई जा रही छतरी की ऊंचाई और डिजाइन ऐसी है कि अब दूर से देखने पर शहीद का चेहरा ही नजर नहीं आता। ऐसे में शहरवासियों का सवाल है कि यदि सौंदर्याकरण का नतीजा शहीद की पहचान छिपाना है, तो आखिर यह काम किसके लिए किया जा रहा है?

धूप-बारिश से बचाने का तर्क, लेकिन चेहरा ही हो गया गायब


जोधपुर विकास प्राधिकरण (JDA) का कहना है कि प्रतिमा को धूप और बारिश से सुरक्षित रखने के लिए छतरी बनाई जा रही है। लेकिन लोगों का कहना है कि सुरक्षा के नाम पर ऐसा ढांचा खड़ा कर दिया गया जिसने प्रतिमा की गरिमा और दृश्यता दोनों को प्रभावित कर दिया।

NHAI ने भी जताई थी आपत्ति


जानकारी के अनुसार, यहां प्रस्तावित एलिवेटेड रोड को देखते हुए NHAI ने भी इस निर्माण पर आपत्ति जताई थी। आशंका थी कि भविष्य में यह संरचना परियोजना में बाधा बन सकती है। इसके बावजूद निर्माण कार्य जारी रखा गया। अब सवाल उठ रहा है कि क्या संबंधित विभागों के बीच समन्वय की कमी का खामियाजा शहर को भुगतना पड़ेगा?

इंजीनियरिंग या केवल ठेकेदारी?


यदि डिजाइन बनने से पहले एक बार भी प्रतिमा की दृश्यता का परीक्षण किया जाता, तो शायद आज यह स्थिति नहीं बनती। ऐसा प्रतीत होता है कि ड्रॉइंग पर हस्ताक्षर तो हो गए, लेकिन किसी ने यह देखने की जरूरत नहीं समझी कि शहीद का चेहरा जनता को दिखाई भी देगा या नहीं। करोड़ों रुपये के विकास कार्यों में यदि संवेदनशीलता और व्यावहारिक सोच का अभाव रहेगा, तो ऐसे सवाल उठना स्वाभाविक हैं।

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कौन थे शहीद बालमुकुंद बिस्सा?


शहीद बालमुकुंद बिस्सा का जन्म 24 दिसंबर 1908 को नागौर जिले के डीडवाना क्षेत्र के पीलवा गांव में हुआ था। वे महात्मा गांधी के विचारों से प्रेरित होकर स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े। 1934 में जोधपुर में चरखा एजेंसी और खादी भंडार की स्थापना की। उनकी “जवाहर खादी” दुकान स्वतंत्रता सेनानियों की गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बनी।
1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। जेल में कैदियों के अधिकारों के लिए उन्होंने भूख हड़ताल की। बिगड़ती तबीयत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां मात्र 34 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। देश के लिए उनके बलिदान के कारण उन्हें राजस्थान का “जतिन दास” भी कहा जाता है।

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जनता पूछ रही है…


शहर का विकास जरूरी है, लेकिन क्या विकास की कीमत शहीदों की गरिमा से चुकाई जानी चाहिए? अब निगाहें JDA पर हैं कि क्या वह इस डिजाइन पर पुनर्विचार करेगा या फिर शहीद की प्रतिमा यूं ही छतरी के पीछे छिपी रहेगी।

रिपोर्टर — युगावर्त व्यास।
फोटो — विजय सांखला।

समय रहते कर ले आवश्यक कार्य।

जोधपुर। युगावर्त व्यास।

जोधपुर शहर में बिजली की लाइनों के रखरखाव का कार्य जारी है। जिसके कारण लगातार अलग—अलग इलाकों में बिजली कटौती कर कार्य किया जा रहा है। इसी के क्रम में आज शहर के विभिन्न इलाकों मे चार घण्टे बिजली कटौती प्रस्तावित है। बिजली विभाग के अधिकारियों ने इसकों लेकर जानकारी जारी करते हुए बताया कि चार घण्टे कटौती के बाद बिजली सुचारू रूप से शुरू कर दी जाएंगी

इस समय होगी बिजली कटौती।
बिजली विभाग की ओर से जारी की गई विज्ञप्ति के अनुसार शहर में बिजली कटौती सुबह 6 बजे से 10 बजे तक व 8 बजे से 11 बजे तक विभिन्न इलाकों में बिजली कटौती की जाएंगी।

सुबह 6 बजे से 10 बजे तक इन इलाकों में नही आएंगी बिजली।
गांधी नगर, सज्जून नगर, शिवाजी नगर, मियां का बेरा, बलदेव नगर, बापू नगर,सेठा सांवरियां नगर,शिव सागर, आर्य नगर, मन्दिर वाला बेरा, भादवा बेरा, मान नगर, मेघ विहार, बाबा रामदेव नगर, कृष्णा नगर, विनायक विहार सहित 11 केवी गांधी नगर ​फीडर से संबंधित इलाकों में सुबह 6 बजे से 10 बजे तक बिजली कटौती रहेंगी।

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सुबह 8 बजे से 11 बजे तक इन क्षेत्रों में नही आएंगी बिजली।
शहर के आदित्य द्वारकाधीश, श्याम बाग, मानपुरा नैनोमेक्स टॉउनशिप, दुधवालों की ढ़ाणी, उचियारड़ा गांव, नैनो की ढ़ाणी सहित 33/11 केवी उचियारड़ा सब स्टेशन से जुड़े सभी इलाकों में सुबह 8 बजे से 11 बजे तक बिजली आपूर्ति ठप्प रहेंगी।

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ग्राउंड रिपोर्ट: जोधपुर टूडे की टीम पहुंची पलासनी

पुणे के चर्चित उद्यमी केतन अग्रवाल हत्याकांड की गूंज अब जोधपुर जिले तक पहुंच गई है। मामले में गिरफ्तार चेतन चौधरी का पैतृक गांव जोधपुर के निकट स्थित पलासनी है। इस बहुचर्चित मामले के बाद जोधपुर टूडे न्यूज की टीम गांव पहुंची और ग्रामीणों से बातचीत कर परिवार और गांव की पृष्ठभूमि को समझने का प्रयास किया

ग्रामीणों ने बताया परिवार का सामाजिक रिकॉर्ड।
ग्रामीणों का कहना है कि चेतन चौधरी के दादा गांव के सम्मानित और सज्जन व्यक्तियों में गिने जाते थे। उनके निधन पर पूरे गांव ने एकजुट होकर श्रद्धांजलि दी थी। गांव के लोगों का कहना है कि परिवार की सामाजिक छवि हमेशा अच्छी रही है और उन्हें विश्वास करना मुश्किल हो रहा है कि चेतन ऐसा कदम उठा सकता है।

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ग्रामीणों को है विश्वास कि जांच के बाद ही सामने आएगी सच्चाई’
ग्रामीणों ने कहा कि फिलहाल मामला जांच के अधीन है। ऐसे में पुलिस और न्यायालय पर पूरा भरोसा है। उनका कहना है कि निष्पक्ष जांच के बाद ही “दूध का दूध और पानी का पानी” हो जाएगा और सच्चाई सभी के सामने आ जाएगी।

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पुणे में हुआ जन्म, 34 वर्षों से वहीं रह रहा परिवार

ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आया कि चेतन चौधरी का जन्म गांव में नहीं बल्कि पुणे में हुआ था। उसके परिवार का गांव से केवल पैतृक संबंध है। ग्रामीणों के अनुसार परिवार पिछले करीब 34 वर्षों से पुणे में रह रहा है। चेतन के पिता वहां किराना दुकान संचालित करते हैं। परिवार में चार बहनें हैं, जिनमें से तीन की शादी हो चुकी है, जबकि एक की शादी होना बाकी है।

क्रिकेट का शौकीन था चेतन।
ग्रामीणों ने बताया कि चेतन चौधरी को क्रिकेट खेलने का बेहद शौक था। उसने विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग लेकर 50 से अधिक मेडल भी हासिल किए थे। गांव के लोग उसके खेल प्रेम का अक्सर जिक्र करते हैं।

हत्या के मामले में पुणे पुलिस कर रही जांच।
गौरतलब है कि पुणे के उद्यमी केतन अग्रवाल की हत्या के मामले में पुणे पुलिस ने चेतन चौधरी और उसकी गर्लफ्रेंड को गिरफ्तार किया है। पुलिस मामले की गहन जांच में जुटी हुई है। फिलहाल पूरे मामले की सच्चाई जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

रिपोर्ट – गिरीश शर्मा।

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