जोधपुर टूडे न्यूज।

पैरोल अवधि समाप्त होने के बाद भी नही उपस्थित हुआ जेल में।
उपाधीक्षक केन्द्रीय कारागार ने मुकदमा करवाया दर्ज।

जोधपुर। चन्द्रशेखर व्यास।
पैरोल अवधि खत्म होने के बाद बंदी के फरार होने का मामला सामने आया है। दरअसल दण्डित बंदी दीपाराम पुत्र मफाजी भील पैरोल अवधि समाप्त होने के बाद भी जेल नही लौटा।
फरार बंदी दीपाराम भील कॉलोनी रायपुर मण्डार सिरोही निवासी बताया जा रहा है।
जेल उपाधीक्षक ने मुकदमा करवाया दर्ज।
जोधपुर सेन्ट्रल जेल उपाधीक्षक ने रातानाडा थाने में इस बाबत मुकदमा दर्ज करवाया है। उन्हाने लिखित शिकायत में बताया कि बंदी दीपाराम पैरोल खत्म होने के बाद से फरार है। वह पैरोल अवधि समाप्त होने के बाद जेल में उपस्थित नही हुआ है। उसे गत 2 जुलाई को सेन्ट्रल जेल में उपस्थित होना था लेकिन वह नही आया।
क्यो दी जाती है बंदियों को पैरोल ?
जेल में बंद बंदियों को खास परिस्थितियों में एक सीमित समय के लिए पैरोल दी जाती है। पैरोल में जेल से बाहर रहने की अनुमति मिलती है। जबकी उनकी सजा जारी रहती है। इसके लिए कैदी का व्यवाहार अच्छा होना चाहिए। उसे धीरे—धीरे फिर से समाज से जोड़ने के लिए पैरोल दी जाती है।
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आपातकालीन परिस्थितियों में पैरोल।
इसके अलावा कुछ आपाकालीन परिस्थितियों में भी पैरोल दी जाती है। परिवार के किसी की गंभीर बिमारी के दौरान उपचार व सेवा के लिए। किसी परिवारिक व्यक्ति की मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार जैसी स्थिति में पैरोल दी जाती है।
क्या है पैरोल की शर्तों का महत्व?
पैरोल देने के दौरान कुछ शर्ते रखी जाती है। जिनका पालन करना कैदीयों के लिए जरूरी होता है। इन शर्तों के तोड़ने पर पैरोल तुरंत रद्द कर दी जाती है। पैरोल मिलने के बाद कोई बंदी जब पैरोल की शर्तों का पालन करता है। पैरोल अवधि समाप्त होने पर जेल में नियत समय पर उपस्थित हो जाता है तो उसे फिर से भविष्य में पैरोल मिलने के अवसर दिए जाते हैं।
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पैरोल से फरार।
जब कोई बंदी पैरोल अवधि समाप्त होने के बाद जेल में उपस्थित नही होता है। तो उसे पैरोल से फरार बंदी घोषित कर दिया जाता है। उसके खिलाफ पैरोल से फरार होने का मुकदमा दर्ज करवाया जाता है। भविष्य में ऐसे बंदियों को पैरोल नहीं दी जाती है।
चन्द्रशेखर व्यास पिछले 18 वर्षो से पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़े है। उन्होंने न्युज 18 राजस्थान, इंडिया टीवी न्यूज, नवभारत टाईम्स, टीवी 9 सहित कई संस्थानों में सेवाएं दी है। विधि की पत्रकारिता क्षेत्र में सलमान खान, आसाराम, भंवरी हत्याकांड सहित कई बड़े मामलों में रिपोर्टिंग की है। इसके अलावा नारी उत्थान को लेकर भी इनकी खबरें नींव का पत्थर साबित हुई है। कई मामलों में हाईकोंर्ट ने इनकी खबरों पर संज्ञान लेकर रिर्पोटेबल जजमेंट सुनाएं है।
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