Month: August 2026

जोधपुर। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) जोधपुर के परिवार के लिए एक गौरवपूर्ण क्षण आया है। विभाग के अधिकारी नरपत को उनकी वीरता और साहस के लिए ‘पुलिस पदक (शौर्य)’ से सम्मानित किया जाना प्रस्तावित है.

अदम्य साहस और राष्ट्र के प्रति समर्पण (घनश्याम सोनी)

नरपत के इस सम्मान पर एनसीबी जोधपुर के जोनल डायरेक्टर घनश्याम सोनी, आईआरएस ने गर्व व्यक्त किया है. विभाग की ओर से उनके अदम्य साहस, वीरता, त्याग और राष्ट्र के प्रति अटूट समर्पण को नमन किया गया है.

सुरक्षा बलों के लिए प्रेरणा

अधिकारियों ने बताया कि नरपत की यह उपलब्धि न केवल एनसीबी जोधपुर परिवार के लिए, बल्कि देश के समस्त सुरक्षा बलों के लिए अत्यंत गर्व का विषय है. यह देश की सुरक्षा में तैनात हर अधिकारी और जवान के लिए प्रेरणा का एक बड़ा स्रोत है.

एनसीबी जोधपुर की ओर से दी गई बधाई

इस उपलब्धि पर एनसीबी जोधपुर परिवार और जोनल डायरेक्टर घनश्याम सोनी की ओर से नरपत को हार्दिक बधाई दी गई है. विभाग की ओर से उनके उज्ज्वल भविष्य और राष्ट्र की सेवा में निरंतर सफलता प्राप्त करने के लिए शुभकामनाएं दी गई हैं.

जोधपुर जिले में प्रशासनिक बदलाव के बाद अब चुनावी बिगुल बजने की तैयारी है। जिले की चार नई नगर पालिकाओं में पहली बार अध्यक्ष और वार्डों के लिए आरक्षण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

अब नगर निगम के साथ-साथ 6 नगर पालिकाएं

​जोधपुर जिले में अब नगर निगम के साथ-साथ 6 नगर पालिकाएं हो गई हैं। इनमें भोपालगढ़, बालेसर, तिंवरी और मथानिया को पंचायत से क्रमोन्नत कर नगर पालिका का दर्जा दिया गया है। प्रशासनिक दृष्टि से यह एक बड़ा बदलाव है, जिसके बाद अब इन क्षेत्रों में पहली बार निकाय चुनाव कराए जाएंगे। इन चुनाव के साथ ही पहली बार इन चारों निकायों में अध्यक्ष और वार्डों के लिए कैटेगरी रिजर्व की जाएगी।

​नए निकायों में चुनावी सरगर्मी

​प्रशासनिक रूप से क्रमोन्नत होने के बाद, इन चार निकायों—भोपालगढ़, बालेसर, तिंवरी और मथानिया—में चुनाव की प्रक्रिया अब अपने महत्वपूर्ण चरण में है। स्थानीय लोगों और संभावित उम्मीदवारों के लिए यह एक नई चुनौती और अवसर है, क्योंकि यहाँ पहली बार नगर पालिका अध्यक्ष का चुनाव होगा।

​आरक्षण का ‘फॉर्मूला’ और निकाय प्रमुख के पद

​राज्य स्तर पर कुल 309 शहरी निकाय हैं। इस बार आरक्षण के लिए जो नया फॉर्मूला लागू किया गया है, उसके तहत:
​OBC वर्ग: 60 निकाय प्रमुखों के पद OBC वर्ग के लिए आरक्षित किए जाएंगे।
​SC वर्ग: 50 निकायों में SC वर्ग के लिए निकाय प्रमुख का पद आरक्षित है।
​ST वर्ग: 11 निकायों में ST वर्ग के लिए निकाय प्रमुख का पद आरक्षित किया गया है।
​आरक्षण की इस प्रक्रिया में महिलाओं के लिए निर्धारित प्रावधानों को भी सख्ती से लागू किया जा रहा है। इसका अर्थ यह है कि SC, ST और OBC वर्ग के लिए आरक्षित निकायों में महिला आरक्षण का प्रावधान अनिवार्य होगा। इसके साथ ही, सामान्य वर्ग की सीटों पर भी महिला आरक्षण के तहत निकाय प्रमुख तय किए जाएंगे।

सीट आरक्षित होने का मतलब क्या है? (आरक्षण का गणित)

​आरक्षण को लेकर अक्सर असमंजस की स्थिति रहती है, लेकिन स्पष्ट नियमों के अनुसार इसका वर्गीकरण इस प्रकार है:
​1. अनारक्षित ओपन (General Open): इन सीटों पर सामान्य वर्ग के अलावा भी किसी भी वर्ग का व्यक्ति प्रत्याशी बन सकता है। यहाँ महिला या पुरुष कोई भी दावेदार हो सकता है।
​2. अनारक्षित महिला (Unreserved Female): इन सीटों पर सामान्य वर्ग के अलावा किसी भी वर्ग की महिलाओं को ही प्रत्याशी बनाया जा सकता है।
​3. OBC ओपन (OBC Open): इन सीटों पर OBC वर्ग से पुरुष या महिला, कोई भी प्रत्याशी बन सकता है।
​4. OBC महिला (OBC Female): ये सीटें केवल OBC महिलाओं की दावेदारी के लिए सुरक्षित हैं।
​5. SC ओपन (SC Open): इन सीटों पर अनुसूचित जाति (SC) से पुरुष या महिला कोई भी प्रत्याशी बन सकता है।
​6. SC महिला (SC Female): इन सीटों पर केवल अनुसूचित जाति (SC) की महिला प्रत्याशी ही चुनाव लड़ सकती है।
​7. ST ओपन (ST Open): इन सीटों पर अनुसूचित जनजाति (ST) से पुरुष या महिला, कोई भी प्रत्याशी बनाया जा सकता है।
​8. ST महिला (ST Female): इन सीटों पर केवल अनुसूचित जनजाति (ST) की महिला को ही प्रत्याशी बनाया जा सकता है।

​चुनावी तैयारी का महत्व

​इन चार निकायों में पहली बार चुनाव होने से स्थानीय राजनीति में बदलाव की उम्मीद है। वार्डों के आरक्षण और अध्यक्ष पद के आरक्षण की स्थिति साफ होने के बाद ही चुनावी गठबंधन और प्रत्याशियों के नामों पर अंतिम मुहर लगेगी। फिलहाल, सभी राजनीतिक दलों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इन नए निकायों में किस प्रकार का आरक्षण समीकरण बनता है और किन वर्गों के उम्मीदवारों को मुख्य मुकाबला लड़ने का मौका मिलता है।

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