ओसियां

जोधपुर जिले में प्रशासनिक बदलाव के बाद अब चुनावी बिगुल बजने की तैयारी है। जिले की चार नई नगर पालिकाओं में पहली बार अध्यक्ष और वार्डों के लिए आरक्षण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

अब नगर निगम के साथ-साथ 6 नगर पालिकाएं

​जोधपुर जिले में अब नगर निगम के साथ-साथ 6 नगर पालिकाएं हो गई हैं। इनमें भोपालगढ़, बालेसर, तिंवरी और मथानिया को पंचायत से क्रमोन्नत कर नगर पालिका का दर्जा दिया गया है। प्रशासनिक दृष्टि से यह एक बड़ा बदलाव है, जिसके बाद अब इन क्षेत्रों में पहली बार निकाय चुनाव कराए जाएंगे। इन चुनाव के साथ ही पहली बार इन चारों निकायों में अध्यक्ष और वार्डों के लिए कैटेगरी रिजर्व की जाएगी।

​नए निकायों में चुनावी सरगर्मी

​प्रशासनिक रूप से क्रमोन्नत होने के बाद, इन चार निकायों—भोपालगढ़, बालेसर, तिंवरी और मथानिया—में चुनाव की प्रक्रिया अब अपने महत्वपूर्ण चरण में है। स्थानीय लोगों और संभावित उम्मीदवारों के लिए यह एक नई चुनौती और अवसर है, क्योंकि यहाँ पहली बार नगर पालिका अध्यक्ष का चुनाव होगा।

​आरक्षण का ‘फॉर्मूला’ और निकाय प्रमुख के पद

​राज्य स्तर पर कुल 309 शहरी निकाय हैं। इस बार आरक्षण के लिए जो नया फॉर्मूला लागू किया गया है, उसके तहत:
​OBC वर्ग: 60 निकाय प्रमुखों के पद OBC वर्ग के लिए आरक्षित किए जाएंगे।
​SC वर्ग: 50 निकायों में SC वर्ग के लिए निकाय प्रमुख का पद आरक्षित है।
​ST वर्ग: 11 निकायों में ST वर्ग के लिए निकाय प्रमुख का पद आरक्षित किया गया है।
​आरक्षण की इस प्रक्रिया में महिलाओं के लिए निर्धारित प्रावधानों को भी सख्ती से लागू किया जा रहा है। इसका अर्थ यह है कि SC, ST और OBC वर्ग के लिए आरक्षित निकायों में महिला आरक्षण का प्रावधान अनिवार्य होगा। इसके साथ ही, सामान्य वर्ग की सीटों पर भी महिला आरक्षण के तहत निकाय प्रमुख तय किए जाएंगे।

सीट आरक्षित होने का मतलब क्या है? (आरक्षण का गणित)

​आरक्षण को लेकर अक्सर असमंजस की स्थिति रहती है, लेकिन स्पष्ट नियमों के अनुसार इसका वर्गीकरण इस प्रकार है:
​1. अनारक्षित ओपन (General Open): इन सीटों पर सामान्य वर्ग के अलावा भी किसी भी वर्ग का व्यक्ति प्रत्याशी बन सकता है। यहाँ महिला या पुरुष कोई भी दावेदार हो सकता है।
​2. अनारक्षित महिला (Unreserved Female): इन सीटों पर सामान्य वर्ग के अलावा किसी भी वर्ग की महिलाओं को ही प्रत्याशी बनाया जा सकता है।
​3. OBC ओपन (OBC Open): इन सीटों पर OBC वर्ग से पुरुष या महिला, कोई भी प्रत्याशी बन सकता है।
​4. OBC महिला (OBC Female): ये सीटें केवल OBC महिलाओं की दावेदारी के लिए सुरक्षित हैं।
​5. SC ओपन (SC Open): इन सीटों पर अनुसूचित जाति (SC) से पुरुष या महिला कोई भी प्रत्याशी बन सकता है।
​6. SC महिला (SC Female): इन सीटों पर केवल अनुसूचित जाति (SC) की महिला प्रत्याशी ही चुनाव लड़ सकती है।
​7. ST ओपन (ST Open): इन सीटों पर अनुसूचित जनजाति (ST) से पुरुष या महिला, कोई भी प्रत्याशी बनाया जा सकता है।
​8. ST महिला (ST Female): इन सीटों पर केवल अनुसूचित जनजाति (ST) की महिला को ही प्रत्याशी बनाया जा सकता है।

​चुनावी तैयारी का महत्व

​इन चार निकायों में पहली बार चुनाव होने से स्थानीय राजनीति में बदलाव की उम्मीद है। वार्डों के आरक्षण और अध्यक्ष पद के आरक्षण की स्थिति साफ होने के बाद ही चुनावी गठबंधन और प्रत्याशियों के नामों पर अंतिम मुहर लगेगी। फिलहाल, सभी राजनीतिक दलों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इन नए निकायों में किस प्रकार का आरक्षण समीकरण बनता है और किन वर्गों के उम्मीदवारों को मुख्य मुकाबला लड़ने का मौका मिलता है।

ओसियां: खुले नाले से लगातार हादसे, सैकड़ों वाहन गिरने के बाद भी नहीं जागा प्रशासन

फोटो : मनीष ओझा।

रेलवे स्टेशन के आगे तिंवरी रोड पर ओझा स्वीट होम के सामने बना खुला नाला बना जानलेवा, ग्राम पंचायत और PWD एक-दूसरे पर डाल रहे जिम्मेदारी।

ओसियां। कस्बे के रेलवे स्टेशन के आगे से मेला मैदान तिंवरी रोड की ओर जाने वाले मार्ग पर. ओझा स्वीट होम के सामने रेलवे की दीवार के पास स्थित खुला नाला. लगातार हादसों को न्योता दे रहा है. स्थानीय लोगों के अनुसार इस नाले में अब तक कई दोपहिया और अन्य वाहन गिर चुके हैं. जबकि कई राहगीर घायल हो चुके हैं. इसके बावजूद संबंधित विभागों की ओर से न तो नाले को ढकने की पहल की गई है और न ही स्थायी समाधान किया गया है.

जिम्मेदारी से बच रहे विभाग

स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस समस्या के समाधान को लेकर, विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं। ग्राम पंचायत का कहना है कि यह क्षेत्र सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) के अधीन आता है. जबकि PWD इसे ग्राम पंचायत का क्षेत्र बताकर, अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहा है. विभागों के इस रवैये का खामियाजा आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है.

हर दिन बना रहता है हादसे का डर

यह मार्ग कस्बे का व्यस्त रास्ता है. जहां से प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग और वाहन गुजरते हैं. रात के समय और बरसात में यह खुला नाला और भी खतरनाक हो जाता है. पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था, बैरिकेडिंग या चेतावनी संकेत नहीं होने से दुर्घटना की आशंका लगातार बनी रहती है.

जनता ने उठाए सवाल

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब लगातार हादसे हो रहे हैं. तो आखिर प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार क्यों कर रहा है? लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है. कि संबंधित विभाग की जिम्मेदारी तत्काल तय कर. नाले को ढकने अथवा उसकी मरम्मत का स्थायी समाधान कराया जाए. ताकि भविष्य में किसी की जान जोखिम में न पड़े.

प्रशासन से कार्रवाई की मांग

क्षेत्रवासियों ने चेतावनी दी है. कि यदि शीघ्र समाधान नहीं किया गया. तो जनहित में आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा. लोगों का कहना है कि प्रशासनिक उदासीनता अब सीधे लोगों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन चुकी है. इस पर तत्काल प्रभावी कार्रवाई आवश्यक है।

ओसियां। जोधपुर जिला कलेक्टर आलोक रंजन ने मंगलवार को अपनी अलग कार्यशैली का एक और उदाहरण पेश करते हुए बिना किसी पूर्व सूचना के ओसियां पहुंचकर पूरे प्रशासनिक तंत्र को चौंका दिया। उनके इस सरप्राइज निरीक्षण ने कुछ देर के लिए पुलिस, प्रशासन और आम लोगों में हलचल मचा दी।

दरअसल, विश्व प्रसिद्ध सच्चियाय माता मंदिर में बम मिलने की सूचना प्रसारित होते ही प्रशासनिक मशीनरी हरकत में आ गई। पुलिस, बम निरोधक दस्ता, डॉग स्क्वॉड, दमकल और चिकित्सा विभाग की टीमें सायरन बजाती हुई मंदिर पहुंचने लगीं। मंदिर परिसर को तत्काल खाली करवाया गया और सुरक्षा एजेंसियों ने मोर्चा संभाल लिया।

लेकिन इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा सरप्राइज तब सामने आया, जब मौके पर स्वयं जिला कलेक्टर आलोक रंजन पहुंच गए। अधिकारियों ने जैसे ही उन्हें देखा, उन्हें समझ आ गया कि यह कोई वास्तविक आपदा नहीं बल्कि जिला कलेक्टर द्वारा आयोजित एक सरप्राइज मॉक ड्रिल है।

कलेक्टर ने किसी भी विभाग को पहले से भनक नहीं लगने दी। उनका उद्देश्य था कि वास्तविक आपात स्थिति में प्रशासन कितनी तेजी और गंभीरता से प्रतिक्रिया देता है, इसकी जमीनी हकीकत को परखा जाए। यही कारण रहा कि सभी विभागों का रिस्पॉन्स टाइम, समन्वय और कार्यप्रणाली वास्तविक परिस्थितियों में जांची जा सकी।

सूत्रों के अनुसार, सूचना मिलते ही सबसे पहले ओसियां थाना पुलिस मौके पर पहुंची और श्रद्धालुओं को सुरक्षित बाहर निकालने का कार्य शुरू किया। इसके बाद अन्य विभागों की टीमें भी पहुंचती गईं। जिला कलेक्टर ने पूरे घटनाक्रम की बारीकी से निगरानी की और विभिन्न विभागों के प्रदर्शन का मूल्यांकन किया।

इस सरप्राइज निरीक्षण ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया कि जिला कलेक्टर आलोक रंजन केवल बैठकों और रिपोर्टों के भरोसे नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर पहुंचकर व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति जानने में विश्वास रखते हैं। उनकी इस कार्यशैली की प्रशासनिक हलकों में दिनभर चर्चा रही।

ओसियां थानाधिकारी राजेन्द्र चौधरी ने बताया कि जैसे ही सूचना मिली, त्वरित कार्रवाई करते हुए हमारी टीम मंदिर में पहुंचकर मंदिर में मौजूद श्रद्धालूओं को रेस्क्यू कर सुरक्षित बाहर निकाला व सर्च आॅपरेशन शुरू किया —राजेन्द्र चौधरी, ओसियां थानाधिकारी।
रिपोर्ट — मनीष ओझा की रिपोर्ट।

ओसियां (जोधपुर)। मनीष ओझा।
विश्व प्रसिद्ध सच्चियाय माता मंदिर में मंगलवार को बम होने की सूचना मिलने से पूरे कस्बे में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही मंदिर परिसर और आसपास के बाजार क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई तथा बड़ी संख्या में लोग मंदिर परिसर के बाहर एकत्रित हो गए।
घटना की जानकारी मिलते ही ओसियां थाना पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची। इसके साथ ही दमकल विभाग, क्विक रिस्पांस टीम (QRT), डॉग स्क्वाड तथा बम निरोधक दस्ता भी मंदिर परिसर में पहुंच गया। सुरक्षा एजेंसियों ने मंदिर और आसपास के क्षेत्र को अपने कब्जे में लेकर सघन तलाशी अभियान शुरू किया। मंदिर के प्रत्येक हिस्से, प्रवेश द्वार, गर्भगृह के आसपास के क्षेत्र और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों की बारीकी से जांच की गई।

मौके पर पहुंची टीमें।

करीब एक घंटे तक चले सर्च ऑपरेशन के दौरान सुरक्षा टीमों ने मंदिर परिसर के चप्पे-चप्पे को खंगाला, लेकिन किसी भी प्रकार की संदिग्ध वस्तु या विस्फोटक सामग्री नहीं मिली। इसके बाद प्रशासन, मंदिर प्रबंधन और स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली।
बाद में जानकारी सामने आई कि यह संभावित रूप से विभिन्न विभागों की तैयारियों और आपातकालीन प्रतिक्रिया क्षमता का परीक्षण करने के लिए आयोजित की गई मॉक ड्रिल थी। इस दौरान पुलिस, दमकल, डॉग स्क्वाड और अन्य एजेंसियों के मौके पर पहुंचने के समय तथा उनकी कार्यप्रणाली का आकलन किया गया।
अचानक हुए इस घटनाक्रम ने लोगों में उत्सुकता भी पैदा कर दी और यह पूरे कस्बे में चर्चा का विषय बना रहा। हालांकि किसी प्रकार का खतरा नहीं मिलने से स्थिति सामान्य हो गई।
रिपोर्टर — मनीष ओझा।

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