जयपुर

डॉ. मोहम्मद इम्तियाज

भ्रूण-लिंग जांच के मामलों में पांच बार गिरफ्तार हो चुके डॉ. मोहम्मद इम्तियाज का मेडिकल रजिस्ट्रेशन राजस्थान मेडिकल काउंसिल ने रद्द कर दिया है। जोधपुर पुलिस द्वारा हिस्ट्रीशीटर घोषित किए गए इस डॉक्टर पर वर्षों से पीसीपीएनडीटी सेल कार्रवाई करती रही। अब वह राजस्थान में चिकित्सा प्रैक्टिस नहीं कर सकेगा।

भ्रूण-लिंग जांच के मामले में कई बार पकड़ा जा चुका डॉक्टर मोहम्मद इम्तियाज अब राजस्थान में प्रैक्टिस नहीं कर पाएगा। राजस्थान मेडिकल कौंसिल ने उसका रजिस्ट्रेशन कैंसिल कर दिया है।
पीसीपीएनडीटी सेल ने 5 बार इम्तियाज को गिरफ्तार किया था। पकड़े जाने के बावजूद भी वह अवैध भ्रूण लिंग जांच का गिरोह चलाता रहा।

करीब 7 साल पहले जोधपुर पुलिस ने इम्तियाज को हिस्ट्रीशीटर घोषित किया था। डॉक्टर की हिस्ट्रीशीट खोलने का ये पहला मामला था।

घर में कर रहा था जांचः

डॉ. मोहम्मद इम्तियाज पहली बार साल अक्टूबर 2016 में अवैध भ्रूण-लिंग जांच करते हुए पकड़ा गया था। उस समय वह बालेसर (जोधपुर) सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) का प्रभारी था।
डॉ. इम्तियाज को अपने साथी भैरोंसिंह के घर जांच करते हुए पकड़ा गया था। इस मामले में वो जेल में भी रहा। स्वास्थ्य विभाग द्वारा 8 अक्टूबर 2016 को सस्पेंड कर दिया गया था।

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साथियों के साथ फिर गिरफ्तार

सात महीने बाद फिर से इस धंधे में शामिल हो गया। मई 2017 में डॉ. इम्तियाजअपने दलाल साथियों के जरिए भ्रूण लिंग जांच करते पकड़ा गया। इस मामले में भी उसे गिरफ्तार किया था।

चलती गाड़ी में कर रहा था टेस्ट

जनवरी 2018 में सेल को सूचना मिली थी कि झुंझुनूं की गर्भवती महिलाओं की अवैध भ्रूण लिंग जांच की जा रही है। टीम ने गर्भवती डिकॉय महिला व सहयोगी को भेजा। जोधपुर पहुंचने पर टीम और डिकाय गर्भवती महिला स्टेशन पहुंचे तो दलाल अपनी गाड़ी में बैठाकर गर्भवती को ले गया। चलती गाड़ी में उसकी जांच की गई। इसके बाद सेल की टीम ने डॉ. इम्तियाज को गिरफ्तार कर लिया। उसके पास पोर्टेबल मशीन और 15 हजार रुपए भी मिले।

दलाल साथी के साथ जांच करते पकड़ा

आरोपी एक बार फिर 9 सितंबर, 2018 को पीसीपीएनडीटी सेल ने डिकॉय ऑपरेशन करते हुए पकड़ा गया। डॉ. इम्तियाज अपने दलाल साथी के साथ एक मकान में गर्भवती का अवैध भ्रूण लिंग परीक्षण करते पकड़ा। इसके बाद साल 2022 में भी डॉ. इम्तियाज के खिलाफ एक और मामला सामने आया था।

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इस तरह कैंसिल हुआ रजिस्ट्रेशन

राजस्थान मेडिकल कौंसिल की 136वीं जनरल बॉडी मीटिंग में 30 जून को डॉ. मोहम्मद इम्तियाज का रजिस्ट्रेशन कैंसिल किया गया है।
मानवाधिकार आयोग, नेशनल मेडिकल कमीशन और पीसीपीएनडीटी सेल द्वारा मिली शिकायतों के आधार पर ये कार्रवाई की है। उन्होंने बताया कि पीनल एंड एथिकल कमेटी में हमारे एक्सपर्ट डॉक्टर्स की कमेटी होती है।
कमेटी वादी और परिवादी दोनों पक्षों को सुनने के साथ ही गवाह-सबूत की जानकारी लेने के बाद निर्णय लेती है। पीएनएल एथिकल कमेटी की अनुशंसा पर जनरल बॉडी निर्णय लेती है।

रजिस्ट्रेशन हुआ रद्द, नही कर पाएंगा राजस्थान में प्रैक्टिस

डॉ गिरधर गोयल,
रजिस्ट्रार, राजस्थान मेडिकल कौंसिल।

राजस्थान मेडिकल कौंसिल के रजिस्ट्रार डॉ गिरधर गोयल ने डॉ मोहम्मद इम्तियाज के रजिस्ट्रेशन रद्द किए जाने की जानकारी देते हुए बताया कि अब डॉ. मोहम्मद इम्तियाज राजस्थान में प्रैक्टिस नहीं कर सकते हैं।

पहली बार खोली गई थी हिस्ट्रीशीट

लगातार भ्रूण लिंग जांच को लेकर कुख्यात हो चुके डॉ. इम्तियाज को जोधपुर पुलिस ने हिस्ट्रीशीटर भी घोषित कर दिया था। चार मामले दर्ज होने के बावजूद वो अवैध भ्रूण-लिंग जांच में शामिल रहा। ऐसे मामलों को देखते हुए 7 साल पहले जोधपुर पुलिस ने हिस्ट्रीशीटर घोषित कर दिया था।

क्या कहता है PC-PNDT एक्ट ?

प्री-कंसेप्शन और प्री-नेटल डायग्नोस्टिक टेक्निक (PC-PNDT) एक्ट भ्रूण के लिंग का पता लगाने की डायग्नोस्टिक टेक्निक पर रोक लगाता है और ऐसा करने वाले डॉक्टर को जिम्मेदार ठहराता है।

जोधपुर/नई दिल्ली। चन्द्रशेखर व्यास।

राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं बाल अधिकार संरक्षण के क्षेत्र में लंबे समय तक उल्लेखनीय सेवाएं देने वाले डॉ. ओम प्रकाश व्यास को दिल्ली राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। उनकी नियुक्ति को बाल अधिकारों और मानवाधिकार संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में निभाई अहम जिम्मेदारियां

डॉ. व्यास इससे पूर्व राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (नई दिल्ली) में जॉइंट रजिस्ट्रार के पद पर कार्यरत रहे हैं। उन्होंने विधि (लॉ) में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की है और अपने कार्यकाल के दौरान मानवाधिकार से जुड़े अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय विषयों पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।

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अंतरराष्ट्रीय मंचों पर किया भारत का प्रतिनिधित्व

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में सेवा के दौरान डॉ. व्यास ने मानवाधिकार से जुड़े कई अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में भारत का प्रतिनिधित्व किया। उनके अनुभव और विशेषज्ञता के कारण उन्हें वैश्विक स्तर पर भी भारत की ओर से महत्वपूर्ण मंचों पर भागीदारी का अवसर मिला।

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बाल श्रमिकों को कराया मुक्त

डॉ. व्यास ने नक्सल प्रभावित राज्यों में विशेष अभियानों के दौरान नक्सलियों की गोलीबारी के बीच बंधक बनाए गए सैकड़ों बाल श्रमिकों को मुक्त कराने में उल्लेखनीय भूमिका निभाई। उनके इस साहसिक और उत्कृष्ट कार्य के लिए भारत के राष्ट्रपति द्वारा उन्हें राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित किया गया।

संयुक्त राष्ट्र सहित कई संस्थानों में रहे विषय विशेषज्ञ

राजस्थान के सीकर जिले के श्रीमाधोपुर कस्बे के निवासी डॉ. ओम प्रकाश व्यास मानवाधिकार कानून के विशेषज्ञ माने जाते हैं। वे संयुक्त राष्ट्र संघ के विभिन्न मंचों पर आमंत्रित विषय विशेषज्ञ के रूप में अपने विचार रख चुके हैं। इसके अलावा देश के विभिन्न राज्यों के पुलिस अधिकारियों, जेल अधिकारियों और मानवाधिकार संस्थाओं को कानून एवं मानवाधिकार विषय पर प्रशिक्षण भी देते रहे हैं।

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बाल अधिकार संरक्षण को मिलेगी नई दिशा

डॉ. व्यास की दिल्ली राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष पद पर नियुक्ति से बाल अधिकारों की सुरक्षा, संरक्षण और संवर्धन के क्षेत्र में आयोग की कार्यप्रणाली को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। वहीं उनके गृह राज्य राजस्थान, विशेषकर सीकर जिले के श्रीमाधोपुर क्षेत्र में इस उपलब्धि पर हर्ष का माहौल है।

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