जोधपुर

जोधपुर, 25 जुलाई। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) जोधपुर का 5वां दीक्षांत समारोह 26 जुलाई को आयोजित किया जाएगा। समारोह में विभिन्न शैक्षणिक कार्यक्रमों के 1189 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की जाएंगी, जबकि 25 मेधावी विद्यार्थियों को संस्थान पदकों से सम्मानित किया जाएगा।

अनुप्रिया पटेल होंगी मुख्य अतिथि

समारोह की मुख्य अतिथि भारत सरकार की स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल होंगी। एम्स जोधपुर के अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) तेजस मधुसूदन पटेल विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। एम्स जोधपुर के कार्यकारी निदेशक डॉ. गोवर्धन दत्त पुरी अतिथियों का स्वागत करेंगे और संस्थान की वार्षिक प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे।

पारंपरिक कार्यक्रमों के साथ होगा शुभारंभ

दीक्षांत समारोह की शुरुआत मुख्य अतिथि के आगमन के साथ होगी। इसके बाद पारंपरिक दीक्षांत शोभायात्रा, राष्ट्रीय गीत, मां सरस्वती की वंदना, दीप प्रज्ज्वलन, अतिथियों का सम्मान और समारोह का औपचारिक उद्घाटन किया जाएगा।

25 पदक और 1189 विद्यार्थियों को उपाधियां

समारोह के दौरान 25 संस्थान पदक प्रदान किए जाएंगे। इसके अलावा डीएम, एमसीएच, एमडी, एमएस, एमडीएस, पीएचडी, मेडटेक, एमएससी (मेडिकल), एमएससी (नर्सिंग), मास्टर ऑफ पब्लिक हेल्थ (एमपीएच), बीएससी (ऑनर्स) नर्सिंग तथा एमबीबीएस सहित विभिन्न पाठ्यक्रमों के 1189 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की जाएंगी।

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दीक्षांत संकल्प और मुख्य अतिथि का संबोधन रहेगा आकर्षण

कार्यक्रम में उपाधि रजिस्टर पर हस्ताक्षर, बीएससी (ऑनर्स) नर्सिंग एवं एमबीबीएस स्नातकों का दीक्षांत संकल्प (एक्सहॉर्टेशन) तथा मुख्य अतिथि का दीक्षांत संबोधन प्रमुख आकर्षण होंगे।

डॉ. गोवर्धन दत्त पुरी बोले— गौरव का अवसर

एम्स जोधपुर के कार्यकारी निदेशक डॉ. गोवर्धन दत्त पुरी ने कहा कि दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों, उनके अभिभावकों और पूरे एम्स परिवार के लिए गर्व का अवसर है। उन्होंने कहा कि यह समारोह शैक्षणिक उत्कृष्टता, व्यावसायिक प्रतिबद्धता और राष्ट्र के लिए दक्ष स्वास्थ्य पेशेवर तैयार करने की संस्थान की निरंतर प्रतिबद्धता का प्रतीक है।

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चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में मजबूत पहचान

एम्स जोधपुर ने पिछले एक दशक में चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और रोगी सेवाओं के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। वर्ष 2012 में स्थापना के बाद से संस्थान आज प्रतिवर्ष 14 लाख से अधिक ओपीडी मरीजों को सेवाएं, 1.37 लाख से अधिक भर्ती मरीजों का उपचार तथा 1.43 लाख से अधिक शल्य चिकित्सा प्रक्रियाएं संपन्न कर रहा है।

संस्थान अंग प्रत्यारोपण, रोबोटिक सर्जरी, न्यूरोसाइंस, हृदय रोग, कैंसर चिकित्सा और न्यूनतम चीरा आधारित उपचार जैसी अत्याधुनिक चिकित्सा सेवाओं में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है। एमबीबीएस से लेकर पीएचडी और सुपर स्पेशियलिटी तक के व्यापक शैक्षणिक कार्यक्रमों के साथ एम्स जोधपुर पश्चिमी राजस्थान का प्रमुख तृतीयक चिकित्सा एवं शैक्षणिक संस्थान बन चुका है।

धन्यवाद ज्ञापन के साथ होगा समापन

समारोह का समापन डीन (अकादमिक) प्रो. (डॉ.) पंकजा रवि राघव के धन्यवाद ज्ञापन, दीक्षांत समारोह के औपचारिक समापन, राष्ट्रगान तथा दीक्षांत शोभायात्रा के प्रस्थान के साथ होगा।

एम्स जोधपुर ने सभी स्नातक विद्यार्थियों को उनके उज्ज्वल एवं सफल भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह दीक्षांत समारोह चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और उत्कृष्ट रोगी सेवा के प्रति संस्थान की सतत प्रतिबद्धता का प्रतीक है।

डीसी रेवेन्यू स्वरूप सिंह सिसोदिया एपीओ

जोधपुर। युगावर्त व्यास।

नगर निगम जोधपुर में प्रशासनिक स्तर पर महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। राजस्व अधिकारी प्रथम एवं उपायुक्त (डीसी) राजस्व स्वरूप सिंह सिसोदिया को पदस्थापन की प्रतीक्षा (एपीओ) में निदेशालय, स्थानीय निकाय विभाग, जयपुर मुख्यालय भेज दिया गया है।

रणवीर सिंह देथा को मिला अतिरिक्त कार्यभार

सिसोदिया के एपीओ होने के बाद निगम प्रशासन ने रणवीर सिंह देथा को उनके वर्तमान दायित्वों के साथ उपायुक्त राजस्व प्रथम एवं द्वितीय से संबंधित सभी कार्यों का अतिरिक्त प्रभार सौंपा है। आदेश के अनुसार वे अब राजस्व शाखा के दोनों अनुभागों का कार्य भी संभालेंगे।

इन विभागों की जिम्मेदारी भी सौंपी गई

रणवीर सिंह देथा को अतिरिक्त प्रभार के तहत निम्न कार्यों की जिम्मेदारी सौंपी गई है—

  • नगरीय विकास कर (यूडी टैक्स) से संबंधित कार्य
  • सरस बूथ प्रबंधन
  • आईटी सेल का संचालन
  • स्थायी एवं अस्थायी संपत्तियों के किराया संबंधी कार्य
  • मैरिज गार्डन से जुड़े प्रकरण
  • होर्डिंग एवं विज्ञापन संबंधी कार्य
  • मोबाइल टॉवर से जुड़े प्रकरण
  • लघु उद्योग से संबंधित कार्य

प्रशासनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए आदेश

नगर निगम प्रशासन की ओर से जारी आदेश के अनुसार यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है। अतिरिक्त कार्यभार सौंपने का उद्देश्य राजस्व एवं अन्य महत्वपूर्ण शाखाओं के कार्यों का निर्बाध संचालन सुनिश्चित करना है। अब रणवीर सिंह देथा अपने वर्तमान दायित्वों के साथ इन सभी विभागों की जिम्मेदारी भी संभालेंगे, जिससे निगम के प्रशासनिक कार्यों में निरंतरता बनी रहेगी।

जोधपुर। युगावर्त व्यास।

गुप्त नवरात्रि के पावन अवसर पर झंवर रोड स्थित बिरला स्कूल के पास मनछापूर्ण महादेव मंदिर में आयोजित सात दिवसीय महाशत रुद्री पार्थिवलिंग अभिषेक अनुष्ठान गुरुवार को विधिवत पूर्णाहुति के साथ संपन्न हुआ। अंतिम दिन वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विशेष पूजा-अर्चना, हवन और संत पूजन का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त किया।

1100 कमल व सुगंधित पुष्पों से हुआ विशेष अभिषेक

अनुष्ठान के दौरान महंत राधेनंद भारती जी महाराज (जूनागढ़) के सान्निध्य में भगवान शिव का विशेष अभिषेक किया गया। इस अवसर पर 1100 कमल पुष्पों के साथ गुलाब, मोगरा एवं अन्य सुगंधित पुष्प अर्पित किए गए। इसके अलावा पंचामृत और विभिन्न पवित्र रसों से पार्थिव शिवलिंग का अभिषेक कर विश्व कल्याण, सुख-समृद्धि एवं शांति की कामना की गई।

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हवन, विसर्जन और संत पूजन का हुआ आयोजन

प्रातः 11 बजे हवन, पूजन एवं पार्थिव शिवलिंगों का विधिवत विसर्जन किया गया। इसके बाद संत पूजन का कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसमें उपस्थित श्रद्धालुओं ने संतों का आशीर्वाद प्राप्त किया। धार्मिक अनुष्ठान पूरे वैदिक विधान और श्रद्धा-भक्ति के वातावरण में संपन्न हुआ।

भजन-सत्संग से भक्तिमय हुआ माहौल

धार्मिक कार्यक्रम के पश्चात आयोजित सत्संग में श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर हो गए। भजन-कीर्तन के माध्यम से भगवान शिव की महिमा का गुणगान किया गया। अंत में महाप्रसादी का वितरण किया गया, जिसके साथ सात दिवसीय धार्मिक आयोजन का समापन हुआ।

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बड़ी संख्या में श्रद्धालु रहे उपस्थित

इस अवसर पर मंदिर समिति के गिरधारी लाल नांगल, यजमान गेनाराम प्रजापत परिवार, मदनलाल जोपिंग, लालाराम प्रजापत, बाबूसिंह राठौड़, श्यामलाल पंवार, मूलाराम, खेमाराम, मेघाराम चौधरी, रामदेव गौड़, पीयूष सुथार सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। सभी ने भगवान शिव की पूजा-अर्चना कर क्षेत्र में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।

जोधपुर। युगावर्त व्याास।

राजकीय नर्सिंग महाविद्यालय, जोधपुर के विद्यार्थियों ने अंगदान को जन-जन तक पहुंचाने और इसे जन-जागरण अभियान का स्वरूप देने के उद्देश्य से मंगलवार को मथुरादास माथुर (एमडीएम) अस्पताल परिसर में प्रभावशाली नुक्कड़ नाटक का आयोजन किया। नाटक के माध्यम से आमजन को अंगदान के महत्व, इसकी प्रक्रिया और ब्रेन डेथ के बाद अंगदान से कई लोगों का जीवन बचाए जाने संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी दी गई।

अंगदान से कई लोगों को मिल सकता है नया जीवन

राजकीय नर्सिंग महाविद्यालय के प्रधानाचार्य मुकेश तेतरवाल ने बताया कि अंगदान एक ऐसा मानवीय कार्य है, जिसके माध्यम से व्यक्ति इस दुनिया से जाने के बाद भी कई लोगों के जीवन में नई उम्मीद जगा सकता है। उन्होंने कहा कि एक छोटा-सा संकल्प भविष्य में कई जरूरतमंद मरीजों को नया जीवन देने का माध्यम बन सकता है। किसी का हृदय धड़कता रहे, किसी की आंखों में फिर से रोशनी आए या किसी को नया जीवन मिले, यह अंगदान के माध्यम से संभव है।

नुक्कड़ नाटक के जरिए दी महत्वपूर्ण जानकारी

अंगदान जागरूकता अभियान के तहत आयोजित इस नुक्कड़ नाटक में नर्सिंग छात्र-छात्राओं ने प्रभावशाली अभिनय के माध्यम से लोगों को बताया कि ब्रेन डेथ को कानूनी और चिकित्सकीय रूप से मृत्यु माना जाता है। ऐसे मामलों में परिजनों की सहमति से अंगदान कर कई जरूरतमंद मरीजों की जान बचाई जा सकती है।

कार्यक्रम का संचालन ज्योति पूनावत, सगुफ्ता सैयद तथा महाविद्यालय के फैकल्टी सदस्यों और विद्यार्थियों के सहयोग से किया गया। नाटक को देखने के लिए अस्पताल परिसर में मौजूद मरीजों, उनके परिजनों और आमजन ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया।

वरिष्ठ चिकित्सकों ने किया प्रेरित

कार्यक्रम में एस.एन. मेडिकल कॉलेज, जोधपुर के प्रधानाचार्य एवं नियंत्रक डॉ. बी.एस. जोधा तथा एमडीएम अस्पताल के अधीक्षक डॉ. विकास राजपुरोहित विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने विद्यार्थियों, फैकल्टी और आमजन को संबोधित करते हुए कहा कि अंगदान एक महान मानवीय सेवा है, जो किसी जरूरतमंद व्यक्ति को नया जीवन देने का अवसर प्रदान करती है।

उन्होंने लोगों से अंगदान के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने और अधिक से अधिक लोगों को इसके लिए जागरूक करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि समाज में फैली भ्रांतियों को दूर कर अंगदान के प्रति विश्वास और जागरूकता बढ़ाना समय की आवश्यकता है।

अंगदान–महादान’ का लिया संकल्प

कार्यक्रम के अंत में नर्सिंग छात्र-छात्राओं ने पूरे उत्साह के साथ “अंगदान–महादान” का संदेश समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाने का संकल्प लिया। महाविद्यालय प्रशासन ने कहा कि ऐसे जागरूकता कार्यक्रम समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के साथ-साथ लोगों को जीवन बचाने जैसे महान कार्य के लिए प्रेरित करते हैं। कॉलेज प्रशासन ने भविष्य में भी अंगदान सहित विभिन्न स्वास्थ्य विषयों पर जन-जागरूकता अभियान लगातार चलाने की बात कही।

आईफोन के नाम पर ग्राहक को मिला डुप्लिकेट फोन, उपभोक्ता आयोग का बड़ा फैसला।
जोधपुर से जुड़ा अहम फैसला, उपभोक्ता को मिली बड़ी राहत।

जोधपुर। चन्द्रशेखर व्यास,

ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म अमेजन को असली आईफोन के नाम पर डुप्लिकेट मोबाइल फोन बेचने के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग (प्रथम), जोधपुर ने बड़ा झटका दिया है। आयोग ने अमेजन के खिलाफ अनुचित व्यापार व्यवहार मानते हुए 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। साथ ही पीड़ित उपभोक्ता को मोबाइल की पूरी कीमत ब्याज सहित लौटाने और मानसिक प्रताड़ना के लिए अलग से मुआवजा देने के आदेश भी जारी किए हैं।

31,999 रुपये में खरीदा था आईफोन

मामले के अनुसार जोधपुर निवासी कविता कटारिया ने जनवरी 2019 में अमेजन से 31,999 रुपये में एप्पल आईफोन-7 खरीदा था। डिलीवरी के बाद मोबाइल फोन में तकनीकी खराबियां सामने आईं। इसके बाद उन्होंने फोन को जोधपुर स्थित अधिकृत एप्पल सर्विस सेंटर पर जांच के लिए भेजा।

जांच में सामने आया बड़ा खुलासा।

एप्पल कंपनी और अधिकृत सर्विस सेंटर की तकनीकी जांच में पता चला कि संबंधित मोबाइल मूल आईफोन नहीं था। जांच रिपोर्ट के अनुसार फोन में दूसरी कंपनी के पार्ट्स लगाकर उसे असेंबल किया गया था। यह खुलासा होने के बाद उपभोक्ता ने जिला उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।

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आयोग ने माना गंभीर सेवा दोष।

मामले की सुनवाई आयोग के अध्यक्ष राजकुमार सुथार एवं सदस्य दिलशाद अली की पीठ ने की। आयोग ने अपने आदेश में कहा कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म द्वारा असली उत्पाद के नाम पर डुप्लिकेट या असेंबल सामान बेचना उपभोक्ताओं के विश्वास के साथ धोखा है। इसे गंभीर सेवा दोष और अनुचित व्यापार व्यवहार माना गया।

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अमेजन को दिए गए ये आदेश

आयोग ने अमेजन को निर्देश दिया कि वह दो माह के भीतर मोबाइल की कीमत 31,999 रुपये तथा सर्विस चार्ज के 1,600 रुपये जून 2019 से 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज सहित उपभोक्ता को लौटाए। इसके अलावा मानसिक संताप के लिए 10,000 रुपये तथा वाद व्यय के रूप में 11,000 रुपये का भुगतान भी किया जाए।

1 लाख का जुर्माना उपभोक्ता कल्याण कोष में जमा होगा।

आयोग ने अमेजन पर लगाए गए 1,00,000 रुपये के जुर्माने को राजस्थान उपभोक्ता कल्याण कोष, जयपुर में जमा कराने का आदेश दिया है। साथ ही कंपनी को भविष्य में इस प्रकार की धोखाधड़ी या अनुचित व्यापार प्रथाओं से बचने की सख्त चेतावनी भी दी गई है। यह फैसला ऑनलाइन खरीदारी करने वाले उपभोक्ताओं के अधिकारों की सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


डॉ. मोहम्मद इम्तियाज

भ्रूण-लिंग जांच के मामलों में पांच बार गिरफ्तार हो चुके डॉ. मोहम्मद इम्तियाज का मेडिकल रजिस्ट्रेशन राजस्थान मेडिकल काउंसिल ने रद्द कर दिया है। जोधपुर पुलिस द्वारा हिस्ट्रीशीटर घोषित किए गए इस डॉक्टर पर वर्षों से पीसीपीएनडीटी सेल कार्रवाई करती रही। अब वह राजस्थान में चिकित्सा प्रैक्टिस नहीं कर सकेगा।

भ्रूण-लिंग जांच के मामले में कई बार पकड़ा जा चुका डॉक्टर मोहम्मद इम्तियाज अब राजस्थान में प्रैक्टिस नहीं कर पाएगा। राजस्थान मेडिकल कौंसिल ने उसका रजिस्ट्रेशन कैंसिल कर दिया है।
पीसीपीएनडीटी सेल ने 5 बार इम्तियाज को गिरफ्तार किया था। पकड़े जाने के बावजूद भी वह अवैध भ्रूण लिंग जांच का गिरोह चलाता रहा।

करीब 7 साल पहले जोधपुर पुलिस ने इम्तियाज को हिस्ट्रीशीटर घोषित किया था। डॉक्टर की हिस्ट्रीशीट खोलने का ये पहला मामला था।

घर में कर रहा था जांचः

डॉ. मोहम्मद इम्तियाज पहली बार साल अक्टूबर 2016 में अवैध भ्रूण-लिंग जांच करते हुए पकड़ा गया था। उस समय वह बालेसर (जोधपुर) सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) का प्रभारी था।
डॉ. इम्तियाज को अपने साथी भैरोंसिंह के घर जांच करते हुए पकड़ा गया था। इस मामले में वो जेल में भी रहा। स्वास्थ्य विभाग द्वारा 8 अक्टूबर 2016 को सस्पेंड कर दिया गया था।

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साथियों के साथ फिर गिरफ्तार

सात महीने बाद फिर से इस धंधे में शामिल हो गया। मई 2017 में डॉ. इम्तियाजअपने दलाल साथियों के जरिए भ्रूण लिंग जांच करते पकड़ा गया। इस मामले में भी उसे गिरफ्तार किया था।

चलती गाड़ी में कर रहा था टेस्ट

जनवरी 2018 में सेल को सूचना मिली थी कि झुंझुनूं की गर्भवती महिलाओं की अवैध भ्रूण लिंग जांच की जा रही है। टीम ने गर्भवती डिकॉय महिला व सहयोगी को भेजा। जोधपुर पहुंचने पर टीम और डिकाय गर्भवती महिला स्टेशन पहुंचे तो दलाल अपनी गाड़ी में बैठाकर गर्भवती को ले गया। चलती गाड़ी में उसकी जांच की गई। इसके बाद सेल की टीम ने डॉ. इम्तियाज को गिरफ्तार कर लिया। उसके पास पोर्टेबल मशीन और 15 हजार रुपए भी मिले।

दलाल साथी के साथ जांच करते पकड़ा

आरोपी एक बार फिर 9 सितंबर, 2018 को पीसीपीएनडीटी सेल ने डिकॉय ऑपरेशन करते हुए पकड़ा गया। डॉ. इम्तियाज अपने दलाल साथी के साथ एक मकान में गर्भवती का अवैध भ्रूण लिंग परीक्षण करते पकड़ा। इसके बाद साल 2022 में भी डॉ. इम्तियाज के खिलाफ एक और मामला सामने आया था।

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इस तरह कैंसिल हुआ रजिस्ट्रेशन

राजस्थान मेडिकल कौंसिल की 136वीं जनरल बॉडी मीटिंग में 30 जून को डॉ. मोहम्मद इम्तियाज का रजिस्ट्रेशन कैंसिल किया गया है।
मानवाधिकार आयोग, नेशनल मेडिकल कमीशन और पीसीपीएनडीटी सेल द्वारा मिली शिकायतों के आधार पर ये कार्रवाई की है। उन्होंने बताया कि पीनल एंड एथिकल कमेटी में हमारे एक्सपर्ट डॉक्टर्स की कमेटी होती है।
कमेटी वादी और परिवादी दोनों पक्षों को सुनने के साथ ही गवाह-सबूत की जानकारी लेने के बाद निर्णय लेती है। पीएनएल एथिकल कमेटी की अनुशंसा पर जनरल बॉडी निर्णय लेती है।

रजिस्ट्रेशन हुआ रद्द, नही कर पाएंगा राजस्थान में प्रैक्टिस

डॉ गिरधर गोयल,
रजिस्ट्रार, राजस्थान मेडिकल कौंसिल।

राजस्थान मेडिकल कौंसिल के रजिस्ट्रार डॉ गिरधर गोयल ने डॉ मोहम्मद इम्तियाज के रजिस्ट्रेशन रद्द किए जाने की जानकारी देते हुए बताया कि अब डॉ. मोहम्मद इम्तियाज राजस्थान में प्रैक्टिस नहीं कर सकते हैं।

पहली बार खोली गई थी हिस्ट्रीशीट

लगातार भ्रूण लिंग जांच को लेकर कुख्यात हो चुके डॉ. इम्तियाज को जोधपुर पुलिस ने हिस्ट्रीशीटर भी घोषित कर दिया था। चार मामले दर्ज होने के बावजूद वो अवैध भ्रूण-लिंग जांच में शामिल रहा। ऐसे मामलों को देखते हुए 7 साल पहले जोधपुर पुलिस ने हिस्ट्रीशीटर घोषित कर दिया था।

क्या कहता है PC-PNDT एक्ट ?

प्री-कंसेप्शन और प्री-नेटल डायग्नोस्टिक टेक्निक (PC-PNDT) एक्ट भ्रूण के लिंग का पता लगाने की डायग्नोस्टिक टेक्निक पर रोक लगाता है और ऐसा करने वाले डॉक्टर को जिम्मेदार ठहराता है।


जोधपुर। चन्द्रशेखर व्यास।

राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य की पंजीकृत गौशालाओं में पेयजल संकट को लेकर राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई है। न्यायालय ने कहा कि वर्ष 2023-24 के बजट में घोषणा होने के बावजूद चार वर्षों में भी गौशालाओं में स्थायी पेयजल व्यवस्था के लिए कोई प्रभावी कार्य नहीं हुआ। कोर्ट ने इसे गंभीर चिंता का विषय बताते हुए सरकार को 15 दिन के भीतर वित्त विभाग से अनुमोदित समयबद्ध कार्ययोजना (Time Bound Schedule) प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।
न्यायमूर्ति डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी एवं न्यायमूर्ति प्रवीर भटनागर की खंडपीठ ने गो ग्राम सेवा संघ, बीकानेर की जनहित याचिका (डी.बी. सिविल रिट पिटीशन संख्या 912/2024) पर 6 जुलाई 2026 को यह महत्वपूर्ण आदेश पारित किया। एडवोकेट मोतीसिंह राजपुरोहित ने इस मामले में याचिकाकर्ता का पक्ष रखा।


3,861 गौशालाएं, 2,220 में ट्यूबवेल नहीं


कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत रिकॉर्ड के अनुसार राजस्थान में 3,861 पंजीकृत गौशालाएं संचालित हैं। इनमें से 1,641 गौशालाओं में स्वयं का ट्यूबवेल उपलब्ध है, जबकि 2,220 गौशालाएं ऐसी हैं जहां स्थायी पेयजल व्यवस्था के लिए ट्यूबवेल लगाने की आवश्यकता है।
कोर्ट ने कहा कि सरकार द्वारा बार-बार प्रयासों का दावा किए जाने के बावजूद जमीन पर एक भी ऐसी गौशाला में स्थायी पेयजल सुविधा विकसित नहीं की गई, जहां इसकी आवश्यकता थी।

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740 गौशालाओं की स्थिति सबसे गंभीर


राज्य सरकार ने स्वयं स्वीकार किया कि 740 गौशालाएं अत्यधिक संकटग्रस्त हैं और वहां तत्काल पेयजल अवसंरचना विकसित करने की जरूरत है। इसके लिए सरकार ने तीन चरणों में योजना प्रस्तुत की—
प्रथम चरण: 387 गौशालाएं (सरकारी भूमि पर)
द्वितीय चरण: 234 गौशालाएं (स्वामित्व अथवा निजी भूमि पर)
तृतीय चरण: 323 गौशालाएं (दान अथवा किराए की भूमि पर)

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कोर्ट बोला—चार वर्षों से केवल आश्वासन


हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि वर्ष 2022 से लगातार आदेश पारित किए जा रहे हैं। 2023, 2024, 2025 और अब 2026 तक भी स्थायी समाधान लागू नहीं हो पाया। गर्मी के मौसम में भी सरकार यह साबित नहीं कर सकी कि गौशालाओं में पर्याप्त पेयजल की व्यवस्था की गई है।
कोर्ट ने कहा कि केवल अस्थायी पानी के टैंकर या अन्य वैकल्पिक व्यवस्थाएं पर्याप्त नहीं हैं। राज्य को दीर्घकालीन एवं स्थायी समाधान लागू करना होगा।


अवमानना की कार्रवाई बनती है, लेकिन फिलहाल टाली


खंडपीठ ने स्पष्ट कहा कि रिकॉर्ड के आधार पर प्रथम दृष्टया अवमानना (Contempt) की कार्रवाई बनती है, क्योंकि पूर्व आदेशों का पालन नहीं हुआ। हालांकि अतिरिक्त महाधिवक्ता, पशुपालन विभाग के सचिव और गोपालन विभाग की निदेशक द्वारा दिए गए आश्वासन को देखते हुए फिलहाल अवमानना पर विचार स्थगित कर दिया गया।


15 दिन में वित्त विभाग से स्वीकृत योजना पेश करने के निर्देश
कोर्ट ने निर्देश दिया कि—


15 दिनों के भीतर वित्त विभाग से परामर्श एवं स्वीकृति प्राप्त समयबद्ध कार्ययोजना न्यायालय में प्रस्तुत की जाए।
यह योजना 21 जुलाई 2026 तक कोर्ट के समक्ष दाखिल की जाए।
किसी भी स्थिति में योजना का क्रियान्वयन तीन माह के भीतर शुरू किया जाए।
व्यवहारिक रूप से कार्य 1 अक्टूबर 2026 से पहले प्रारंभ होना चाहिए।


याचिकाकर्ता के सुझावों पर भी विचार


याचिकाकर्ता की ओर से तीन सुझाव दिए गए, जिन पर कोर्ट ने सरकार को विचार करने की स्वतंत्रता दी
जहां संभव हो, तीन फेज बिजली कनेक्शन के बजाय सिंगल फेज कनेक्शन देकर ट्यूबवेल शीघ्र शुरू किए जाएं।
मानसून आने तक गौशालाओं में वर्तमान अस्थायी पेयजल व्यवस्था पूरी मजबूती से जारी रखी जाए ताकि पशुओं को पानी की कमी न हो।
जिन क्षेत्रों में भूजल उपलब्ध नहीं है, वहां ट्यूबवेल के स्थान पर पाइपलाइन अथवा वाटर होज व्यवस्था को वैकल्पिक समाधान के रूप में अपनाने पर विशेषज्ञ निर्णय लें।


वित्त सचिव को भी बनाया पक्षकार


सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की मौखिक प्रार्थना पर राजस्थान सरकार के वित्त विभाग के सचिव को भी मामले में प्रतिवादी बनाया गया है। कोर्ट ने उन्हें नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं।
हालांकि अगली सुनवाई पर पशुपालन विभाग के सचिव एवं गोपालन विभाग की निदेशक की व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट प्रदान कर दी गई है।
अगली सुनवाई 27 जुलाई
हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई 2026 निर्धारित की है। तब तक राज्य सरकार को वित्त विभाग की स्वीकृति सहित विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत करनी होगी।

वर्ष 2016 की दवा खरीद में 61.24 लाख रुपये के कथित घोटाले पर एफआईआर।
पांच नामजद सहित अन्य के खिलाफ मामला दर्ज।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और IPC की विभिन्न धाराओं में मुकदमा, सीएमएचओ कार्यालय जोधपुर से जुड़ा मामला।

जोधपुर। चन्द्रशेखर व्यास।

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने वर्ष 2016 में जोधपुर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) कार्यालय में दवाइयों एवं चिकित्सा सामग्री की खरीद में कथित अनियमितताओं के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए एफआईआर दर्ज की है। एसीबी जिला जयपुर के सीपीएस थाना में दर्ज एफआईआर संख्या 182/2026 में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धाराओं 13(1)(d), 13(2) तथा भारतीय दंड संहिता की धाराएं 467, 468, 471, 477-ए एवं 120-बी के तहत मामला दर्ज किया गया है।
एफआईआर के अनुसार यह मामला वर्ष 2016 में हुई खरीद प्रक्रिया से संबंधित है, जबकि शिकायत के आधार पर 6 जुलाई 2026 को प्रकरण दर्ज किया गया।

इन लोगों को बनाया गया आरोपी

एफआईआर में तत्कालीन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय से जुड़े खरीद प्रकरण में पांच लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया है। इनमें गिरधारी सिंह उदावत, सुभोद सक्सेना (मैसर्स हर्ष डिस्ट्रीब्यूटर्स), जय कुमार शर्मा (मैकोन फार्मा), कमलेश बोहरा (सीमा मेडिकल) तथा गौतमकांत लाढा (ललित फार्मा) के नाम शामिल हैं। इसके अलावा अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच की जाएगी।

क्या है पूरा मामला?

एफआईआर में उल्लेख है कि वर्ष 2016 में राज्य सरकार की नि:शुल्क दवा योजना के तहत जोधपुर सीएमएचओ कार्यालय द्वारा विभिन्न दवाइयों एवं चिकित्सा सामग्री की खरीद के लिए निविदाएं आमंत्रित की गई थीं। आरोप है कि खरीद प्रक्रिया में निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया गया तथा निविदा प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं बरती गईं।
जांच में आरोप लगाया गया है कि निविदा प्रक्रिया में कुछ फर्मों को अनुचित लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से नियमों की अनदेखी की गई। साथ ही खरीद आदेश जारी करने और भुगतान की प्रक्रिया में भी रिकॉर्ड में हेरफेर एवं दस्तावेजों के कथित फर्जी उपयोग की बात सामने आई है।

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61.24 लाख रुपये की सरकारी राशि का नुकसान

एफआईआर के अनुसार कथित अनियमितताओं के कारण सरकार को 61,24,671 रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ। इस राशि को सरकारी संपत्ति के रूप में दर्शाते हुए भ्रष्टाचार एवं वित्तीय अनियमितता का मामला दर्ज किया गया है।

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विभिन्न फर्मों को जारी किए गए थे खरीद आदेश

एफआईआर में सीमा मेडिकल, मैकोन फार्मा, ललित फार्मा सहित अन्य फर्मों को वर्ष 2016 के दौरान लाखों रुपये के खरीद आदेश जारी किए जाने का उल्लेख है। आरोप है कि निविदा प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही खरीद आदेश जारी किए गए तथा नियमों के विपरीत भुगतान भी किया गया। जांच में खरीद आदेशों, भुगतान रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेजों की विस्तृत जांच की जाएगी।

पूर्व जांच के बाद दर्ज हुई एफआईआर।

प्रकरण में पहले प्रारंभिक जांच कराई गई थी। जांच रिपोर्ट में खरीद प्रक्रिया में अनियमितताओं, नियमों का उल्लंघन तथा सरकारी धन के दुरुपयोग के प्रथम दृष्टया साक्ष्य मिलने के बाद एसीबी ने नियमित एफआईआर दर्ज की है। इसके आधार पर अब विस्तृत आपराधिक जांच शुरू कर दी गई है।

एसीबी करेगी दस्तावेजों और भुगतान की गहन जांच।

एफआईआर दर्ज होने के बाद एसीबी अब संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों और फर्मों से जुड़े दस्तावेजों, भुगतान रिकॉर्ड, निविदा प्रक्रिया तथा खरीद आदेशों की गहन जांच करेगी। जांच के दौरान आवश्यकता पड़ने पर अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका भी जांच के दायरे में लाई जा सकती है।

किन धाराओं में दर्ज हुआ मामला ?

एसीबी ने इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(1)(d) एवं 13(2) के साथ भारतीय दंड संहिता की धाराएं 467 (जालसाजी), 468 (धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी), 471 (फर्जी दस्तावेज का उपयोग), 477-ए (लेखा अभिलेखों में हेरफेर) तथा 120-बी (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत मुकदमा दर्ज किया है।

आज दोपहर 3 बजे सजा पर सुनाएगा कोर्ट का फैसला।


जोधपुर। चन्द्रशेखर व्यास।

चार माह की मासूम बच्ची से दुष्कर्म के बहुचर्चित मामले में पोक्सो ग्रामीण कोर्ट ने आरोपी रोहित कुमार उर्फ रोहन कुमार, निवासी बिहार, को दोषी करार दिया है। मामले में सजा का ऐलान आज दोपहर 3 बजे किया जाएगा।

इस संवेदनशील प्रकरण की सुनवाई फास्ट ट्रैक आधार पर हुई।


घटना 15 मार्च 2025 की है। पीड़िता के माता-पिता ईंट भट्टे पर मजदूरी करते थे। कार्य के दौरान वे अपनी चार माह की मासूम बच्ची को फैक्ट्री परिसर में स्थित अपने कमरे में छोड़कर काम पर गए थे। कुछ समय बाद लौटने पर बच्ची घायल अवस्था में मिली। बच्ची की हालत देखकर परिजनों के होश उड़ गए।

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मौके पर पकड़ा आरोपी को।


परिजनों ने मौके पर ही आरोपी रोहित कुमार उर्फ रोहन कुमार को पकड़ लिया। और आसपास के लोगों को इसकी सूचना दी। इसके बाद मासूम को तत्काल अस्पताल ले जाया गया। जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए जोधपुर के उम्मेद अस्पताल रेफर किया गया।

फास्टट्रैक कोर्ट में हुई सुनवाई।


मामले में पुलिस ने 15 मार्च 2025 को जोधपुर ग्रामीण थाने में प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।

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ऐसे चली सुनवाई।

लोक अभियोजक – नरपत चौधरी।

लोक अभियोजक नरपत चौधरी ने बताया कि पोक्सो ग्रामीण कोर्ट के न्यायाधीश डॉ दुष्यंत दत्त ने अभियोजन पक्ष की दलीलों और साक्ष्यों को स्वीकार करते हुए आरोपी को दोषी करार दिया है। सजा के बिंदु पर फैसला दोपहर 3 बजे सुनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से 23 गवाहों के बयान और 53 दस्तावेजी व अन्य साक्ष्य न्यायालय में प्रस्तुत किए गए।

समाज को संदेश।


जनजागरूकता संदेश: बच्चों की सुरक्षा समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। माता-पिता, अभिभावकों और आम नागरिकों को बच्चों के प्रति होने वाले किसी भी प्रकार के अपराध या संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तत्काल पुलिस को देनी चाहिए, ताकि ऐसे अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।

पैरोल अवधि समाप्त होने के बाद भी नही उपस्थित हुआ जेल में।
उपाधीक्षक केन्द्रीय कारागार ने मुकदमा करवाया दर्ज।

जोधपुर। चन्द्रशेखर व्यास।

पैरोल अवधि खत्म होने के बाद बंदी के फरार होने का मामला सामने आया है। दरअसल दण्डित बंदी दीपाराम पुत्र मफाजी भील पैरोल अवधि समाप्त होने के बाद भी जेल नही लौटा।
फरार बंदी दीपाराम भील कॉलोनी रायपुर मण्डार सिरोही निवासी बताया जा रहा है।

जेल उपाधीक्षक ने मुकदमा करवाया दर्ज।

जोधपुर सेन्ट्रल जेल उपाधीक्षक ने रातानाडा थाने में इस बाबत मुकदमा दर्ज करवाया है। उन्हाने लिखित शिकायत में बताया कि बंदी दीपाराम पैरोल खत्म होने के बाद से फरार है। वह पैरोल अवधि समाप्त होने के बाद जेल में उपस्थित नही हुआ है। उसे गत 2 जुलाई को सेन्ट्रल जेल में उपस्थित होना था लेकिन वह नही आया।

क्यो दी जाती है बंदियों को पैरोल ?

जेल में बंद बंदियों को खास परिस्थितियों में एक ​सीमित समय के लिए पैरोल दी जाती है। पैरोल में जेल से बाहर रहने की अनुमति मिलती है। जबकी उनकी सजा जारी रहती है। इसके लिए कैदी का व्यवाहार अच्छा होना चाहिए। उसे धीरे—धीरे फिर से समाज से जोड़ने के लिए पैरोल दी जाती है।

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आपा​तकालीन परिस्थितियों में पैरोल।

इसके अलावा कुछ आपाकालीन परिस्थितियों में भी पैरोल दी जाती है। परिवार के किसी की गंभीर बिमारी के दौरान उपचार व सेवा के लिए। किसी परिवारिक व्यक्ति की मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार जैसी स्थिति में पैरोल दी जाती है।

क्या है पैरोल की शर्तों का महत्व?

पैरोल देने के दौरान कुछ शर्ते रखी जाती है। जिनका पालन करना कैदीयों के लिए जरूरी होता है। इन शर्तों के तोड़ने पर पैरोल तुरंत रद्द कर दी जाती है। पैरोल मिलने के बाद कोई बंदी जब पैरोल की शर्तों का पालन करता है। पैरोल अवधि समाप्त होने पर जेल में नियत समय पर उपस्थित हो जाता है तो उसे फिर से भविष्य में पैरोल मिलने के अवसर दिए जाते हैं।

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पैरोल से फरार।

जब कोई बंदी पैरोल अवधि समाप्त होने के बाद जेल में उ​पस्थित नही होता है। तो उसे पैरोल से फरार बंदी घोषित कर दिया जाता है। उसके खिलाफ पैरोल से फरार होने का मुकदमा दर्ज करवाया जाता है। भविष्य में ऐसे बंदियों को पैरोल नहीं दी जाती है।

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