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चन्द्रशेखर व्यास पिछले 18 वर्षो से पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़े है। उन्होंने न्युज 18 राजस्थान, इंडिया टीवी न्यूज, नवभारत टाईम्स, टीवी 9 सहित कई संस्थानों में सेवाएं दी है। विधि की पत्रकारिता क्षेत्र में सलमान खान, आसाराम, भंवरी हत्याकांड सहित कई बड़े मामलों में रिपोर्टिंग की है। इसके अलावा नारी उत्थान को लेकर भी इनकी खबरें नींव का पत्थर साबित हुई है। कई मामलों में हाईकोंर्ट ने इनकी खबरों पर संज्ञान लेकर रिर्पोटेबल जजमेंट सुनाएं है।

ओसियां। जोधपुर जिला कलेक्टर आलोक रंजन ने मंगलवार को अपनी अलग कार्यशैली का एक और उदाहरण पेश करते हुए बिना किसी पूर्व सूचना के ओसियां पहुंचकर पूरे प्रशासनिक तंत्र को चौंका दिया। उनके इस सरप्राइज निरीक्षण ने कुछ देर के लिए पुलिस, प्रशासन और आम लोगों में हलचल मचा दी।

दरअसल, विश्व प्रसिद्ध सच्चियाय माता मंदिर में बम मिलने की सूचना प्रसारित होते ही प्रशासनिक मशीनरी हरकत में आ गई। पुलिस, बम निरोधक दस्ता, डॉग स्क्वॉड, दमकल और चिकित्सा विभाग की टीमें सायरन बजाती हुई मंदिर पहुंचने लगीं। मंदिर परिसर को तत्काल खाली करवाया गया और सुरक्षा एजेंसियों ने मोर्चा संभाल लिया।

लेकिन इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा सरप्राइज तब सामने आया, जब मौके पर स्वयं जिला कलेक्टर आलोक रंजन पहुंच गए। अधिकारियों ने जैसे ही उन्हें देखा, उन्हें समझ आ गया कि यह कोई वास्तविक आपदा नहीं बल्कि जिला कलेक्टर द्वारा आयोजित एक सरप्राइज मॉक ड्रिल है।

कलेक्टर ने किसी भी विभाग को पहले से भनक नहीं लगने दी। उनका उद्देश्य था कि वास्तविक आपात स्थिति में प्रशासन कितनी तेजी और गंभीरता से प्रतिक्रिया देता है, इसकी जमीनी हकीकत को परखा जाए। यही कारण रहा कि सभी विभागों का रिस्पॉन्स टाइम, समन्वय और कार्यप्रणाली वास्तविक परिस्थितियों में जांची जा सकी।

सूत्रों के अनुसार, सूचना मिलते ही सबसे पहले ओसियां थाना पुलिस मौके पर पहुंची और श्रद्धालुओं को सुरक्षित बाहर निकालने का कार्य शुरू किया। इसके बाद अन्य विभागों की टीमें भी पहुंचती गईं। जिला कलेक्टर ने पूरे घटनाक्रम की बारीकी से निगरानी की और विभिन्न विभागों के प्रदर्शन का मूल्यांकन किया।

इस सरप्राइज निरीक्षण ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया कि जिला कलेक्टर आलोक रंजन केवल बैठकों और रिपोर्टों के भरोसे नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर पहुंचकर व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति जानने में विश्वास रखते हैं। उनकी इस कार्यशैली की प्रशासनिक हलकों में दिनभर चर्चा रही।

ओसियां थानाधिकारी राजेन्द्र चौधरी ने बताया कि जैसे ही सूचना मिली, त्वरित कार्रवाई करते हुए हमारी टीम मंदिर में पहुंचकर मंदिर में मौजूद श्रद्धालूओं को रेस्क्यू कर सुरक्षित बाहर निकाला व सर्च आॅपरेशन शुरू किया — राजेन्द्र चौधरी, ओसियां थानाधिकारी।
रिपोर्ट — मनीष ओझा की रिपोर्ट।

ओसियां (जोधपुर)। मनीष ओझा।
विश्व प्रसिद्ध सच्चियाय माता मंदिर में मंगलवार को बम होने की सूचना मिलने से पूरे कस्बे में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही मंदिर परिसर और आसपास के बाजार क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई तथा बड़ी संख्या में लोग मंदिर परिसर के बाहर एकत्रित हो गए।
घटना की जानकारी मिलते ही ओसियां थाना पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची। इसके साथ ही दमकल विभाग, क्विक रिस्पांस टीम (QRT), डॉग स्क्वाड तथा बम निरोधक दस्ता भी मंदिर परिसर में पहुंच गया। सुरक्षा एजेंसियों ने मंदिर और आसपास के क्षेत्र को अपने कब्जे में लेकर सघन तलाशी अभियान शुरू किया। मंदिर के प्रत्येक हिस्से, प्रवेश द्वार, गर्भगृह के आसपास के क्षेत्र और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों की बारीकी से जांच की गई।

मौके पर पहुंची टीमें।

करीब एक घंटे तक चले सर्च ऑपरेशन के दौरान सुरक्षा टीमों ने मंदिर परिसर के चप्पे-चप्पे को खंगाला, लेकिन किसी भी प्रकार की संदिग्ध वस्तु या विस्फोटक सामग्री नहीं मिली। इसके बाद प्रशासन, मंदिर प्रबंधन और स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली।
बाद में जानकारी सामने आई कि यह संभावित रूप से विभिन्न विभागों की तैयारियों और आपातकालीन प्रतिक्रिया क्षमता का परीक्षण करने के लिए आयोजित की गई मॉक ड्रिल थी। इस दौरान पुलिस, दमकल, डॉग स्क्वाड और अन्य एजेंसियों के मौके पर पहुंचने के समय तथा उनकी कार्यप्रणाली का आकलन किया गया।
अचानक हुए इस घटनाक्रम ने लोगों में उत्सुकता भी पैदा कर दी और यह पूरे कस्बे में चर्चा का विषय बना रहा। हालांकि किसी प्रकार का खतरा नहीं मिलने से स्थिति सामान्य हो गई।
रिपोर्टर — मनीष ओझा।

राजस्थान में तबादलों पर लगा बैन हटते ही जनप्रतिनिधियों के दफ्तरों में ट्रांसफर की डिज़ायर लिखवाने वालों की भीड़ उमड़ने लगी है। लेकिन इस बीच जोधपुर शहर से भाजपा विधायक Atul Bhansali ने ऐसा अनूठा प्रयोग किया है, जिसकी चर्चा राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक हो रही है।
विधायक कार्यालय में ट्रांसफर की अनुशंसा करवाने आने वाले लोगों के लिए एक विशेष “निवेदन बॉक्स” लगाया गया है। खास बात यह है कि यह बॉक्स भगवान श्रीराम की प्रतिमा के सामने रखा गया है। अब जो भी व्यक्ति अपनी डिज़ायर या अनुशंसा लेकर विधायक कार्यालय पहुंचता है, उसे सीधे इस बॉक्स में अपना आवेदन डालने के लिए कहा जाता है।
बॉक्स पर लिखा गया है “मैं अपनी अनुशंसा प्रभु श्रीराम को समर्पित करता हूँ।”
वहीं विधायक की ओर से संदेश भी अंकित है कि “सबकी मनोकामना पूर्ण करने वाले परमपिता परमेश्वर से प्रार्थना है कि सभी की इच्छाएं पूरी हों।”
तबादला सीजन शुरू होते ही नेताओं के दफ्तरों में सिफारिशी पत्रों और डिज़ायरों का दबाव बढ़ जाता है। ऐसे माहौल में विधायक भंसाली का यह प्रयोग लोगों का ध्यान खींच रहा है। कुछ लोग इसे आस्था से जोड़कर देख रहे हैं तो कुछ इसे बढ़ती डिज़ायर संस्कृति पर व्यंग्य के रूप में भी देख रहे हैं।
हालांकि इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक सवाल भी चर्चा का विषय बना हुआ है। विधायकों की डिज़ायर से आखिर कितनों के तबादले होते हैं? क्योंकि सरकारी प्रक्रिया अपनी जगह है, लेकिन लोगों का मानना है कि भगवान के दरबार में की गई प्रार्थना कभी व्यर्थ नहीं जाती।
फिलहाल जोधपुर में “रामजी के सामने डिज़ायर बॉक्स” वाला यह नवाचार लोगों के बीच चर्चा और जिज्ञासा का विषय बना हुआ है।

रिपोर्टर — चन्द्रशेखर व्यास।

जोधपुर, 23 जून। जोधपुर में प्रस्तावित एलिवेटेड रोड को लेकर सियासी घमासान लगातार तेज होता जा रहा है। एक ओर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत इस परियोजना की मंजूरी का श्रेय अपने प्रयासों को दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत इसे केंद्र सरकार की उपलब्धि बता रहे हैं। दोनों नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर अब खुलकर सामने आने लगा है।
मंगलवार को जोधपुर दौरे पर आए पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सर्किट हाउस में पत्रकारों से बातचीत करते हुए दावा किया कि एलिवेटेड रोड परियोजना को गति दिलाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि जब उनकी सरकार इस परियोजना पर काम कर रही थी, तब सबसे बड़ी चुनौती इसकी डिजाइन और तकनीकी स्वीकृति को लेकर थी।
गहलोत ने बताया कि एलिवेटेड रोड की डिजाइन और तकनीकी पहलुओं पर काम करने की जिम्मेदारी केंद्र सरकार की एजेंसियों और नेशनल हाईवे अथॉरिटी के इंजीनियरों के पास थी। ऐसे में उन्होंने तत्कालीन केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को पत्र लिखकर हस्तक्षेप का आग्रह किया था।
उन्होंने कहा, “मैंने नितिन गडकरी जी को पत्र लिखा था। उन्होंने मेरे पत्र पर तुरंत सकारात्मक प्रतिक्रिया दी और काम आगे बढ़ाने का आश्वासन दिया। गडकरी जी अच्छे इंसान हैं। उन्होंने बिना किसी राजनीतिक भेदभाव के परियोजना को आगे बढ़ाने में सहयोग किया।”
पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि इसी पहल और प्रयास के कारण परियोजना को आवश्यक स्वीकृतियां मिलीं और काम आगे बढ़ सका। इसी आधार पर उन्होंने कहा कि एलिवेटेड रोड के पीछे उनके प्रयासों की बड़ी भूमिका रही है।
श्रेय लेने पर नहीं आपत्ति, लेकिन राजनीति पर सवाल
केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत पर निशाना साधते हुए गहलोत ने कहा कि यदि वे इस परियोजना का श्रेय लेना चाहते हैं तो उन्हें उससे कोई आपत्ति नहीं है।
उन्होंने कहा, “वे मंत्री हैं, स्वाभाविक है कि श्रेय लेना चाहेंगे। मुझे इसमें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन गलत और गंदी राजनीति नहीं करनी चाहिए। जनता सब जानती है कि किसने कब और क्या प्रयास किए हैं।”
शेखावत के बयान के बाद बढ़ा विवाद
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले इसी सर्किट हाउस में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने अशोक गहलोत पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया था कि “जोधपुर शहर को पिछड़ा रखने का पाप अशोक गहलोत ने किया है।”
शेखावत के इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल गर्मा गया था और अब गहलोत ने भी जवाबी हमला करते हुए एलिवेटेड रोड परियोजना को लेकर अपना पक्ष मजबूती से रखा है।
श्रेय की लड़ाई बनी चर्चा का विषय
जोधपुर की बहुप्रतीक्षित एलिवेटेड रोड अभी निर्माण से पहले ही राजनीतिक बहस का केंद्र बन गई है। शहर के विकास से जुड़ी इस परियोजना पर कांग्रेस और भाजपा के दो बड़े नेताओं के बीच श्रेय की जंग लगातार तेज होती नजर आ रही है। आने वाले दिनों1 में यह मुद्दा स्थानीय राजनीति का प्रमुख विषय बना रह सकता है, क्योंकि दोनों पक्ष जनता के सामने अपनी-अपनी भूमिका को प्रमुखता से रखने में जुटे हुए हैं।

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जोधपुर। सांसद और विधायक घोड़ो, गधो, भैंस और बकरियों की तरह बिक रहे है। यह बात पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने जोधपुर के सर्किट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए कही।
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने मंगलवार को जोधपुर के सर्किट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान राजनीतिक दलों में हो रही टूट-फूट और जनप्रतिनिधियों की खरीद-फरोख्त के विषय को लेकर गहरी चिंता व्य​​क्त करते हुए यह बयान दिया उन्होंने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि देश की राजनीति में हालात इतने खराब हो गए हैं कि “सांसद और विधायक घोड़े-गधों की तरह बिक रहे हैं।”
गहलोत ने महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल तथा अन्य राज्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस प्रकार विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद और विधायक अपनी पार्टियां छोड़कर दूसरी पार्टियों में शामिल हो रहे हैं या अलग गुट बनाकर सत्ता परिवर्तन में भूमिका निभा रहे हैं, वह लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक व्यवस्था में धनबल और सत्ता के प्रभाव का दखल लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे जनादेश की भावना कमजोर हो रही है। गहलोत ने कहा कि जनता जिन प्रतिनिधियों को एक विचारधारा और पार्टी के आधार पर चुनकर भेजती है, उनका बीच कार्यकाल में दल बदलना लोकतंत्र की आत्मा के खिलाफ है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाने और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए राजनीतिक खरीद-फरोख्त पर प्रभावी अंकुश लगाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि यही स्थिति बनी रही तो जनता का लोकतांत्रिक व्यवस्था से विश्वास कमजोर पड़ सकता है।
गहलोत के इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर सियासी बहस तेज होने की संभावना है।
रिपोर्टर — मनोज गिरी गोस्वामी।

जोधपुर। विश्व संगीत दिवस की पूर्व संध्या पर 20 जून को जोधपुर की सुप्रसिद्ध एवं चर्चित संस्था संस्कारी इवेंट्स द्वारा रोटरी क्लब में हिंदी फिल्मी गीतों के कराओके ट्रैक पर आधारित एक भव्य संगीतमय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में निपुण गायकों के साथ-साथ गाने के शौकीन बच्चों, बड़ों तथा सभी आयु वर्ग की महिलाओं और पुरुषों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए महान गायकों के लोकप्रिय गीतों की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं, जिससे उपस्थित श्रोताओं का मन प्रफुल्लित हो उठा।

संस्था के संस्थापक अभिषेक शर्मा एवं वंदना शर्मा ने बताया कि संस्कारी इवेंट्स समय-समय पर धार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक एवं अन्य रचनात्मक कार्यक्रमों का आयोजन करती रहती है। उन्होंने कहा कि संस्था का मुख्य उद्देश्य धार्मिक संस्कारों के साथ-साथ जनमानस में संगीत के प्रति गहरा रुझान विकसित करना है।

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि रोटरी क्लब की अध्यक्ष श्रीमती मधु समदानी एवं संगीत शिक्षक श्री कमलेश पुरोहित ‘निराला’ रहे। इस अवसर पर निराला जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि “संगीत ईश्वर की देन है और शब्द स्वयं ईश्वर का स्वरूप हैं।” उन्होंने संगीत को आध्यात्मिकता, मानसिक शांति एवं सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने का सशक्त माध्यम बताया।
रिपोर्ट — चन्द्रशेखर व्यास।

जोधपुर। राजस्थान नर्सेज एसोसिएशन (आरएनए) की ओर से रविवार को मथुरादास माथुर चिकित्सालय (एमडीएम) में विभिन्न नर्सिंग एवं स्वास्थ्यकर्मी हितों से जुड़े मुद्दों को लेकर गेट मीटिंग आयोजित की गई। बैठक में बड़ी संख्या में नर्सिंग अधिकारियों और स्वास्थ्यकर्मियों ने भाग लिया तथा संगठन की मांगों के समर्थन में एकजुटता दिखाई।
दीपक खोरवाल के परिवार को न्याय दिलाने की मांग
मीटिंग में स्वर्गीय दीपक खोरवाल के परिवार को न्याय दिलाने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। वक्ताओं ने कहा कि परिवार को उचित न्याय और सहायता मिलनी चाहिए तथा सरकार को इस मामले में संवेदनशीलता दिखाते हुए आवश्यक कदम उठाने चाहिए।
प्रदेश में टेंडर प्रथा समाप्त करने की मांग
नर्सेज एसोसिएशन ने स्वास्थ्य विभाग में चल रही निविदा (टेंडर) व्यवस्था पर पूर्ण रोक लगाने की मांग की। संगठन का कहना है कि टेंडर आधारित व्यवस्था से कर्मचारियों के हित प्रभावित हो रहे हैं और स्थायी रोजगार की संभावनाएं कम हो रही हैं।
मेरिट और बोनस के आधार पर हो नर्सिंग भर्ती
बैठक में आगामी नर्सिंग भर्ती प्रक्रिया को मेरिट एवं बोनस अंकों के आधार पर आयोजित करने की मांग भी रखी गई। संगठन का कहना है कि इससे योग्य और अनुभवी अभ्यर्थियों को उचित अवसर मिल सकेगा।
संविदा और एनएचएम कर्मियों के समायोजन की मांग
मीटिंग में सेवा से हटाए गए संविदा कर्मियों, 108 एम्बुलेंस कर्मचारियों, एनएचएम और अन्य निविदा आधारित कर्मचारियों का विभिन्न सरकारी योजनाओं में समायोजन करने की मांग की गई। संगठन ने कहा कि वर्षों से सेवा दे रहे कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित किया जाना चाहिए।
लंबित ट्रांसफर प्रक्रिया शुरू करने पर जोर
नर्सिंग अधिकारियों ने लंबे समय से लंबित स्थानांतरण प्रक्रिया को जल्द शुरू करने की मांग भी उठाई। कर्मचारियों का कहना है कि ट्रांसफर नहीं होने से कई कार्मिकों को पारिवारिक और प्रशासनिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
मांगें नहीं मानी तो आंदोलन की चेतावनी
बैठक में उपस्थित कर्मचारियों ने सरकार से मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने का आग्रह किया। साथ ही चेतावनी दी कि यदि समय रहते समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो राजस्थान नर्सेज एसोसिएशन व्यापक आंदोलन की रणनीति अपनाने को मजबूर होगा।
संगठित रहने का आह्वान
राजस्थान नर्सेज एसोसिएशन ने सभी नर्सिंग एवं स्वास्थ्यकर्मी साथियों से संगठित रहकर अपने अधिकारों की लड़ाई को मजबूती देने का आह्वान किया।
— रिपोर्ट: जोधपुर टुडे न्यूज

जोधपुर। चन्द्रशेखर व्यास।
कोटा और ​बीकानेर में सीजेरियन डिलीवरी के बाद प्रसुताओं की तबीयत बिगड़ने का मामला सामने आने के बाद अब जोधपुर के पावटा अस्पताल से भी ऐसी ही खबर सामने आई है जिसमें आठ प्रसुताओं की तबीयत बिगड़ने के बाद चिकित्सा विभाग में हड़कम्प मच गया।

संक्रमण के कारण के कारण दो प्रसुताओं की किडनी पर आया असर, एमडीएम अस्पताल में किया रैफर।
पावटा अस्पताल अधीक्षक डॉ कुलबीर सिंह चौपड़ा ने बताया कि कल इस बात की जानकारी मिली की शनिवार को अस्पताल में सीजेरियन प्रसव किए गए। इस दौरान दो प्रसुताओं की तबीयत बिगड़ गई। उनके किडनी पर इसका असर सामने आया, जिसके बाद मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ बीएस जोधा को इस बात की जानकारी दी गई। उनके निर्देश पर तुरंत दोनों को एमडीएम अस्पताल मेडिकल आईसीयू में रैफर कर दिया गया। ऐतिहात के तौर पर 6 प्रसुताओं को हाईडोज एंटिबाइटिक आॅबर्जवेशन पर रखा गया है। उनका कहना है कि तेज गर्मी के कारण आजकल संक्रमण का खतरा रहता है तो पावटा अस्पताल में शेष 6 प्रसुताओं को हायर एंटिबाइटिक आॅबजर्वेश पर रखा गया है। उन्होंने बताया कि पावटा अस्पताल में भर्ती सभी 6 प्रसुताओं की स्थिति ​ठीक है। उनकी पल्स व ब्लड प्रेशर सही है। सभी की स्थिति की जांच रिपोर्ट हर दो घण्टे में ली जा रही है जिसकी जानकारी मेडिकल कॉलेज प्राचार्य को भी दी जा रही है।

पावटा अस्पताल का आॅपरेशन थियेटर किया बंद, सभी सैम्पल्स किए एकत्रित।
पावटा अस्पताल अधीक्षक ने बताया कि फिलहाल मामले की जांच चल रही है जिसके कारण अस्पताल की ओटी को बंद कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि मरीजों व सीजेरियन के दौरान काम में आई दवाओं, इंजेक्शन सहित आॅपरेशन थियेटर से सभी प्रकार के सैम्पल्स एकत्रित कर लिए गए है, जिन्हें जांच के लिए भेजा गया है।

राज्य सरकार ने तुरंत जांच कमेटी का किया गठन, दवाओं पर लगाई रोक।
पावटा अस्पताल अधीक्षक डॉ चौपड़ा ने बताया कि इस मामले को लेकर राज्य सरकार की ओर से एक जांच कमेटी का गठन किया गया, जिसमें डॉक्टर्स, ड्रग इंस्पेक्टर सहित अन्य लोग शामिल है। इस कमेटी द्वारा सैम्पल्स की जांच की जा रही हैं। इसके अलावा सीजेरियन प्रक्रिया के दौरान काम ली गई दवाओं पर तुरंत प्रभाव से रोक लगा दी गई है।

हर माह होती है करीब 40 सीजेरियन डिलीवरी, 10 वर्षो में पहली बार ऐसा मामला आया सामने।
पावटा अस्पताल अधीक्षक डॉ चौपड़ा ने बताया कि इस अस्पताल में हर महिने करीब 40 सीजेरियन डिलीवरी करवाई जाती है। इस तरह का मामला पहली बार सामने आया। जैसे ही इसकी जानकारी मिली त्वरीत कदम उठाएं गए। फिलहाल जांच जारी है, जांच रिपोर्ट के बाद पूरी जानकारी सामने आएंगी।

डॉ कुलबीर सिंह चौपड़ा,पावटा अस्पताल अधीक्षक

एक प्रसु​ता शुगर की बिमारी से ग्रसित, दुसरी को हुई थी ब्लिडिंग।
डॉ एस एन मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ ​बीएस जोधा ने बताया कि उन्हें इस बात की जानकारी दी गई कि शनिवार को पावटा अस्पताल में सीजिरियन आॅपरेशन के बाद दो प्रसुताओं की ​तबीयत बिगड़ी थी। जिसमें से एक प्रसुता को शुगर की बिमारी थी व दुसरी प्रसुता को रक्त स्त्राव हुआ था। जिसके बाद उनके निर्देश पर दोनों को एमडीएम अस्पताल रैफर कर दिया गया। दोनों प्रसुताओं की डॉक्टर लगातार निगरानी कर रहे है। उन्होंने बताया कि आईसीयू में उपचाराधीन प्रसुताओं के सैम्पल्स लिए गए है। इसके अलावा पावटा अस्पताल से ओटी व दवाओं के भी सैम्पल्स लिए गए है, उनकी रिपोर्ट आने का फिलहाल हम इंतजार कर रहे है।
उन्होंने बताया कि कई तरह की संभावनाएं होती है। जिसमें किसी मरीज की बीपी ज्यादा हो, प्रसुता डायबिटिक हो तो प्रसुता रिस्क में रहती है। ऐसे में रक्त स्त्राव ज्यादा होने पर कि​डनी जो कि बॉडी का सबसे संवेदनशील पार्ट है उस पर असर पड़ सकता है। एक महिला को डायलिसि​स भी दिया गया है।
उनका कहना है कि इस मौसम के अंदर दवाओं, भोजन व पर्यावरण पर असर पड़ता है। मरीज किस स्थिति में अस्पताल आया इन सभी तथ्यों का विश्लेषण किया जा रहा है। फिलहाल सभी के स्वास्थ्य में सुधार है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे इलाज उसके अनुरूप दवाओं से किया जाएंगा।

डॉ ​बी एस जोधा, प्राचार्य, डॉ एस एन मेडिकल कॉलेज।

एक प्रसुता को एम्स किया रैफर।
एमडीएम अस्पताल अधीक्षक डॉ विकास राजपुरोहित ने बताया कि दो प्रसुताओं की तबीयत बिगड़ने के बाद एमडीएम अस्पताल लाया गया था। जिसमें दईजर निवासी सोनू व मथानियां निवासी ललिता को आईसीयू में भर्ती किया गया था। ललिता को शुगर की समस्या है व उसका रक्तचाप भी लगातार कम हो रहा था तो ऐसे में उसे एम्स अस्पताल रैफर किया गया है। सोनू की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है व मेडिकल कॉलेज प्राचार्य को भी लगातार स्थिति से अवगत करवाया जा रहा है।

डॉ विकास राजपुरोहित, अधीक्षक, एमडीएम अस्पताल

जोधपुर। मनोज गिरी गोस्वामी।
जोधपुर की सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर अनीता विश्नोई के कथित आत्महत्या प्रयास मामले में दर्ज प्रकरण में नामजद लोगों में शामिल मालाराम विश्नोई को केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (सीबीएन) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए गिरफ्तार किया है।
सीबीएन नीमच की टीम ने आगरा-जयपुर हाईवे पर कार्रवाई करते हुए एक लग्जरी कार से 115.160 किलोग्राम अफीम बरामद की। जब्त मादक पदार्थ की अनुमानित बाजार कीमत करीब 5 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
जानकारी के अनुसार, सीबीएन को गुवाहाटी से जोधपुर की ओर अवैध मादक पदार्थ ले जाए जाने की सूचना मिली थी। इसके बाद टीम ने करीब 2000 किलोमीटर तक संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी रखी। 20 जून की सुबह सिकंदरा टोल प्लाजा के पास झारखंड नंबर की हुंडई क्रेटा कार को रोककर तलाशी ली गई।
तलाशी के दौरान कार की डिक्की से 109 पैकेटों में पैक 115.160 किलोग्राम अफीम बरामद हुई। जांच में सामने आया कि मादक पदार्थ को तीन बोरों में छिपाकर रखा गया था तथा गंध छिपाने के लिए वाहन में बड़ी मात्रा में इत्र और परफ्यूम का उपयोग किया गया था।
सीबीएन ने अफीम और वाहन को जब्त कर फलोदी निवासी मालाराम विश्नोई को एनडीपीएस एक्ट के तहत गिरफ्तार किया। आरोपी को दौसा स्थित एनआई कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे दो दिन के रिमांड पर भेजा गया है।
सूत्रों के अनुसार, रिमांड प्रक्रिया पूरी होने के बाद जोधपुर पुलिस भी अनीता विश्नोई मामले में आरोपी से पूछताछ के लिए प्रोटेक्शन वारंट लेने की तैयारी कर सकती है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और संबंधित एजेंसियां विभिन्न पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं।

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जोधपुर। चन्द्रशेखर व्यास।

राजस्थान में सिजेरियन डिलीवरी के बाद प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। कोटा और बीकानेर के बाद अब जोधपुर के पावटा जिला अस्पताल में भी ऐसा मामला सामने आया है। यहां शनिवार को सिजेरियन ऑपरेशन से प्रसव कराने वाली 8 महिलाओं की तबीयत बाद में बिगड़ गई, जिसके बाद अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया।
जानकारी के अनुसार, सभी प्रसूताओं की डिलीवरी शनिवार को पावटा जिला अस्पताल में हुई थी। इसके बाद महिलाओं में स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएं सामने आईं। मामले को गंभीरता से लेते हुए अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर को एहतियातन बंद कर दिया गया है और संक्रमण की आशंका को लेकर जांच शुरू कर दी गई है।
एसएन मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. बी.एस. जोधा ने बताया कि प्रभावित महिलाओं में से दो की हालत गंभीर होने पर उन्हें मथुरादास माथुर (एमडीएम) अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहीं अन्य छह प्रसूताओं का उपचार पावटा अस्पताल में जारी है।
डॉ. जोधा के अनुसार, एक महिला को अत्यधिक रक्तस्राव (ब्लीडिंग) की समस्या हुई थी, जबकि दूसरी महिला पहले से मधुमेह (डायबिटीज) से पीड़ित थी और उसका ब्लड प्रेशर भी काफी कम हो गया था। सभी मरीजों की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और आवश्यक उपचार दिया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है। अस्पताल में संक्रमण के संभावित कारणों की पड़ताल की जा रही है तथा ऑपरेशन थिएटर से नमूने लेकर परीक्षण करवाए जा रहे हैं। मामले की रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

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