ओसियां

ओसियां: खुले नाले से लगातार हादसे, सैकड़ों वाहन गिरने के बाद भी नहीं जागा प्रशासन

फोटो : मनीष ओझा।

रेलवे स्टेशन के आगे तिंवरी रोड पर ओझा स्वीट होम के सामने बना खुला नाला बना जानलेवा, ग्राम पंचायत और PWD एक-दूसरे पर डाल रहे जिम्मेदारी।

ओसियां। कस्बे के रेलवे स्टेशन के आगे से मेला मैदान तिंवरी रोड की ओर जाने वाले मार्ग पर. ओझा स्वीट होम के सामने रेलवे की दीवार के पास स्थित खुला नाला. लगातार हादसों को न्योता दे रहा है. स्थानीय लोगों के अनुसार इस नाले में अब तक कई दोपहिया और अन्य वाहन गिर चुके हैं. जबकि कई राहगीर घायल हो चुके हैं. इसके बावजूद संबंधित विभागों की ओर से न तो नाले को ढकने की पहल की गई है और न ही स्थायी समाधान किया गया है.

जिम्मेदारी से बच रहे विभाग

स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस समस्या के समाधान को लेकर, विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं। ग्राम पंचायत का कहना है कि यह क्षेत्र सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) के अधीन आता है. जबकि PWD इसे ग्राम पंचायत का क्षेत्र बताकर, अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहा है. विभागों के इस रवैये का खामियाजा आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है.

हर दिन बना रहता है हादसे का डर

यह मार्ग कस्बे का व्यस्त रास्ता है. जहां से प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग और वाहन गुजरते हैं. रात के समय और बरसात में यह खुला नाला और भी खतरनाक हो जाता है. पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था, बैरिकेडिंग या चेतावनी संकेत नहीं होने से दुर्घटना की आशंका लगातार बनी रहती है.

जनता ने उठाए सवाल

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब लगातार हादसे हो रहे हैं. तो आखिर प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार क्यों कर रहा है? लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है. कि संबंधित विभाग की जिम्मेदारी तत्काल तय कर. नाले को ढकने अथवा उसकी मरम्मत का स्थायी समाधान कराया जाए. ताकि भविष्य में किसी की जान जोखिम में न पड़े.

प्रशासन से कार्रवाई की मांग

क्षेत्रवासियों ने चेतावनी दी है. कि यदि शीघ्र समाधान नहीं किया गया. तो जनहित में आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा. लोगों का कहना है कि प्रशासनिक उदासीनता अब सीधे लोगों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन चुकी है. इस पर तत्काल प्रभावी कार्रवाई आवश्यक है।

ओसियां। जोधपुर जिला कलेक्टर आलोक रंजन ने मंगलवार को अपनी अलग कार्यशैली का एक और उदाहरण पेश करते हुए बिना किसी पूर्व सूचना के ओसियां पहुंचकर पूरे प्रशासनिक तंत्र को चौंका दिया। उनके इस सरप्राइज निरीक्षण ने कुछ देर के लिए पुलिस, प्रशासन और आम लोगों में हलचल मचा दी।

दरअसल, विश्व प्रसिद्ध सच्चियाय माता मंदिर में बम मिलने की सूचना प्रसारित होते ही प्रशासनिक मशीनरी हरकत में आ गई। पुलिस, बम निरोधक दस्ता, डॉग स्क्वॉड, दमकल और चिकित्सा विभाग की टीमें सायरन बजाती हुई मंदिर पहुंचने लगीं। मंदिर परिसर को तत्काल खाली करवाया गया और सुरक्षा एजेंसियों ने मोर्चा संभाल लिया।

लेकिन इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा सरप्राइज तब सामने आया, जब मौके पर स्वयं जिला कलेक्टर आलोक रंजन पहुंच गए। अधिकारियों ने जैसे ही उन्हें देखा, उन्हें समझ आ गया कि यह कोई वास्तविक आपदा नहीं बल्कि जिला कलेक्टर द्वारा आयोजित एक सरप्राइज मॉक ड्रिल है।

कलेक्टर ने किसी भी विभाग को पहले से भनक नहीं लगने दी। उनका उद्देश्य था कि वास्तविक आपात स्थिति में प्रशासन कितनी तेजी और गंभीरता से प्रतिक्रिया देता है, इसकी जमीनी हकीकत को परखा जाए। यही कारण रहा कि सभी विभागों का रिस्पॉन्स टाइम, समन्वय और कार्यप्रणाली वास्तविक परिस्थितियों में जांची जा सकी।

सूत्रों के अनुसार, सूचना मिलते ही सबसे पहले ओसियां थाना पुलिस मौके पर पहुंची और श्रद्धालुओं को सुरक्षित बाहर निकालने का कार्य शुरू किया। इसके बाद अन्य विभागों की टीमें भी पहुंचती गईं। जिला कलेक्टर ने पूरे घटनाक्रम की बारीकी से निगरानी की और विभिन्न विभागों के प्रदर्शन का मूल्यांकन किया।

इस सरप्राइज निरीक्षण ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया कि जिला कलेक्टर आलोक रंजन केवल बैठकों और रिपोर्टों के भरोसे नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर पहुंचकर व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति जानने में विश्वास रखते हैं। उनकी इस कार्यशैली की प्रशासनिक हलकों में दिनभर चर्चा रही।

ओसियां थानाधिकारी राजेन्द्र चौधरी ने बताया कि जैसे ही सूचना मिली, त्वरित कार्रवाई करते हुए हमारी टीम मंदिर में पहुंचकर मंदिर में मौजूद श्रद्धालूओं को रेस्क्यू कर सुरक्षित बाहर निकाला व सर्च आॅपरेशन शुरू किया — राजेन्द्र चौधरी, ओसियां थानाधिकारी।
रिपोर्ट — मनीष ओझा की रिपोर्ट।

ओसियां (जोधपुर)। मनीष ओझा।
विश्व प्रसिद्ध सच्चियाय माता मंदिर में मंगलवार को बम होने की सूचना मिलने से पूरे कस्बे में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही मंदिर परिसर और आसपास के बाजार क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई तथा बड़ी संख्या में लोग मंदिर परिसर के बाहर एकत्रित हो गए।
घटना की जानकारी मिलते ही ओसियां थाना पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची। इसके साथ ही दमकल विभाग, क्विक रिस्पांस टीम (QRT), डॉग स्क्वाड तथा बम निरोधक दस्ता भी मंदिर परिसर में पहुंच गया। सुरक्षा एजेंसियों ने मंदिर और आसपास के क्षेत्र को अपने कब्जे में लेकर सघन तलाशी अभियान शुरू किया। मंदिर के प्रत्येक हिस्से, प्रवेश द्वार, गर्भगृह के आसपास के क्षेत्र और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों की बारीकी से जांच की गई।

मौके पर पहुंची टीमें।

करीब एक घंटे तक चले सर्च ऑपरेशन के दौरान सुरक्षा टीमों ने मंदिर परिसर के चप्पे-चप्पे को खंगाला, लेकिन किसी भी प्रकार की संदिग्ध वस्तु या विस्फोटक सामग्री नहीं मिली। इसके बाद प्रशासन, मंदिर प्रबंधन और स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली।
बाद में जानकारी सामने आई कि यह संभावित रूप से विभिन्न विभागों की तैयारियों और आपातकालीन प्रतिक्रिया क्षमता का परीक्षण करने के लिए आयोजित की गई मॉक ड्रिल थी। इस दौरान पुलिस, दमकल, डॉग स्क्वाड और अन्य एजेंसियों के मौके पर पहुंचने के समय तथा उनकी कार्यप्रणाली का आकलन किया गया।
अचानक हुए इस घटनाक्रम ने लोगों में उत्सुकता भी पैदा कर दी और यह पूरे कस्बे में चर्चा का विषय बना रहा। हालांकि किसी प्रकार का खतरा नहीं मिलने से स्थिति सामान्य हो गई।
रिपोर्टर — मनीष ओझा।

GTM-WL5JC38G