
जोधपुर। चन्द्रशेखर व्यास।
कोटा और बीकानेर में सीजेरियन डिलीवरी के बाद प्रसुताओं की तबीयत बिगड़ने का मामला सामने आने के बाद अब जोधपुर के पावटा अस्पताल से भी ऐसी ही खबर सामने आई है जिसमें आठ प्रसुताओं की तबीयत बिगड़ने के बाद चिकित्सा विभाग में हड़कम्प मच गया।
संक्रमण के कारण के कारण दो प्रसुताओं की किडनी पर आया असर, एमडीएम अस्पताल में किया रैफर।
पावटा अस्पताल अधीक्षक डॉ कुलबीर सिंह चौपड़ा ने बताया कि कल इस बात की जानकारी मिली की शनिवार को अस्पताल में सीजेरियन प्रसव किए गए। इस दौरान दो प्रसुताओं की तबीयत बिगड़ गई। उनके किडनी पर इसका असर सामने आया, जिसके बाद मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ बीएस जोधा को इस बात की जानकारी दी गई। उनके निर्देश पर तुरंत दोनों को एमडीएम अस्पताल मेडिकल आईसीयू में रैफर कर दिया गया। ऐतिहात के तौर पर 6 प्रसुताओं को हाईडोज एंटिबाइटिक आॅबर्जवेशन पर रखा गया है। उनका कहना है कि तेज गर्मी के कारण आजकल संक्रमण का खतरा रहता है तो पावटा अस्पताल में शेष 6 प्रसुताओं को हायर एंटिबाइटिक आॅबजर्वेश पर रखा गया है। उन्होंने बताया कि पावटा अस्पताल में भर्ती सभी 6 प्रसुताओं की स्थिति ठीक है। उनकी पल्स व ब्लड प्रेशर सही है। सभी की स्थिति की जांच रिपोर्ट हर दो घण्टे में ली जा रही है जिसकी जानकारी मेडिकल कॉलेज प्राचार्य को भी दी जा रही है।
पावटा अस्पताल का आॅपरेशन थियेटर किया बंद, सभी सैम्पल्स किए एकत्रित।
पावटा अस्पताल अधीक्षक ने बताया कि फिलहाल मामले की जांच चल रही है जिसके कारण अस्पताल की ओटी को बंद कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि मरीजों व सीजेरियन के दौरान काम में आई दवाओं, इंजेक्शन सहित आॅपरेशन थियेटर से सभी प्रकार के सैम्पल्स एकत्रित कर लिए गए है, जिन्हें जांच के लिए भेजा गया है।
राज्य सरकार ने तुरंत जांच कमेटी का किया गठन, दवाओं पर लगाई रोक।
पावटा अस्पताल अधीक्षक डॉ चौपड़ा ने बताया कि इस मामले को लेकर राज्य सरकार की ओर से एक जांच कमेटी का गठन किया गया, जिसमें डॉक्टर्स, ड्रग इंस्पेक्टर सहित अन्य लोग शामिल है। इस कमेटी द्वारा सैम्पल्स की जांच की जा रही हैं। इसके अलावा सीजेरियन प्रक्रिया के दौरान काम ली गई दवाओं पर तुरंत प्रभाव से रोक लगा दी गई है।
हर माह होती है करीब 40 सीजेरियन डिलीवरी, 10 वर्षो में पहली बार ऐसा मामला आया सामने।
पावटा अस्पताल अधीक्षक डॉ चौपड़ा ने बताया कि इस अस्पताल में हर महिने करीब 40 सीजेरियन डिलीवरी करवाई जाती है। इस तरह का मामला पहली बार सामने आया। जैसे ही इसकी जानकारी मिली त्वरीत कदम उठाएं गए। फिलहाल जांच जारी है, जांच रिपोर्ट के बाद पूरी जानकारी सामने आएंगी।

डॉ कुलबीर सिंह चौपड़ा,पावटा अस्पताल अधीक्षक
एक प्रसुता शुगर की बिमारी से ग्रसित, दुसरी को हुई थी ब्लिडिंग।
डॉ एस एन मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ बीएस जोधा ने बताया कि उन्हें इस बात की जानकारी दी गई कि शनिवार को पावटा अस्पताल में सीजिरियन आॅपरेशन के बाद दो प्रसुताओं की तबीयत बिगड़ी थी। जिसमें से एक प्रसुता को शुगर की बिमारी थी व दुसरी प्रसुता को रक्त स्त्राव हुआ था। जिसके बाद उनके निर्देश पर दोनों को एमडीएम अस्पताल रैफर कर दिया गया। दोनों प्रसुताओं की डॉक्टर लगातार निगरानी कर रहे है। उन्होंने बताया कि आईसीयू में उपचाराधीन प्रसुताओं के सैम्पल्स लिए गए है। इसके अलावा पावटा अस्पताल से ओटी व दवाओं के भी सैम्पल्स लिए गए है, उनकी रिपोर्ट आने का फिलहाल हम इंतजार कर रहे है।
उन्होंने बताया कि कई तरह की संभावनाएं होती है। जिसमें किसी मरीज की बीपी ज्यादा हो, प्रसुता डायबिटिक हो तो प्रसुता रिस्क में रहती है। ऐसे में रक्त स्त्राव ज्यादा होने पर किडनी जो कि बॉडी का सबसे संवेदनशील पार्ट है उस पर असर पड़ सकता है। एक महिला को डायलिसिस भी दिया गया है।
उनका कहना है कि इस मौसम के अंदर दवाओं, भोजन व पर्यावरण पर असर पड़ता है। मरीज किस स्थिति में अस्पताल आया इन सभी तथ्यों का विश्लेषण किया जा रहा है। फिलहाल सभी के स्वास्थ्य में सुधार है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे इलाज उसके अनुरूप दवाओं से किया जाएंगा।

डॉ बी एस जोधा, प्राचार्य, डॉ एस एन मेडिकल कॉलेज।
एक प्रसुता को एम्स किया रैफर।
एमडीएम अस्पताल अधीक्षक डॉ विकास राजपुरोहित ने बताया कि दो प्रसुताओं की तबीयत बिगड़ने के बाद एमडीएम अस्पताल लाया गया था। जिसमें दईजर निवासी सोनू व मथानियां निवासी ललिता को आईसीयू में भर्ती किया गया था। ललिता को शुगर की समस्या है व उसका रक्तचाप भी लगातार कम हो रहा था तो ऐसे में उसे एम्स अस्पताल रैफर किया गया है। सोनू की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है व मेडिकल कॉलेज प्राचार्य को भी लगातार स्थिति से अवगत करवाया जा रहा है।

डॉ विकास राजपुरोहित, अधीक्षक, एमडीएम अस्पताल
